(पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी) - तापमान के आधार पर वनस्पतियों का वर्गीकरण, ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट, लूकोपोडियुम, समायोजन की प्रक्रिया व प्रकाश संश्लेषण

सामान्य विज्ञान (General Science)

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Environment and Ecology)

तापर्यावरण, बायोम, पारिस्थितिकी संरचना

PLANT KINGDOM


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BRYOPHYTES में प्रजातियों की संख्या सबसे अधिक होती है। ये सामान्यतः शीत-आर्द्र जलवायु प्रदेश अर्थात टुण्ड्र जलवायु प्रदेश और ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में टुण्ड्रा या अल्पाइन वनस्पति के रूप में मिलते है। इनमे जल की अवशोषण करने की क्षयता होती है इसलिए मृदा संरक्षण के साथ मृदा निर्माणकारी प्रक्रम में सहायता होते है। इनके कार्बनिक पदार्थो को 'पीट' भी कहते है जिसका उपयोग ईंधन के स्रोत के रूप में किया जा सकता है। sphagnum का Peat के रूप में सर्वाधिक उपयोग होता है। Mosses का उपयोग Anti biotic बनाने के लिए किया जाता है।

PTERIDOPHYTES


BRYOPHYTES की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक तापमान वाले क्षेत्रों में मिलते है। प्रकाश किरणों की तीरवता अत्यन्त कम होने पर भी इनके द्वारा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है इसलिए ये छाया प्रदेश में भी मिलते है यहाँ तक की रेतीली मिटटी में भी इनका विकास संभव है। eg: PTERIDIUM - इसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है।

LYCOPODIUM - इससे औषधिका उत्पादन किया जाता है। Fern का उपयोग Ornamental Plant के रूप में किया जाता है।

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Gymnosperm में वृक्षों के समूह होते है जिनमें प्रजातियों की संख्या सबसे कम है इसलिए वन बायोम में Gymnosperm की प्रजातिय विविधता सबसे कम होती है। इस प्रकार की वनस्पति साइबेरियन तुल्य जलवायु या शीत आर्द्र जलवायु प्रदेश में मिलते है जिनका संबध टैंगा बायोम से है सामान्यता: इनकी वृक्ष की लकड़ियाँ अत्यन्त मुलायम होती है इसलिए इनका उपयोग कागज बनाने के लिए किया जाता है। Snow Fall adaptation ie , हिम वर्षा से समायोजर के लिए PINUS की शाखाएँ नीचे की ओर झुकी होती है। ये सदाबहार वनस्पति होते है। कैलिफोर्निया के भूमध्य सागरीय जलवायु प्रदेश में Red Giant Sequoia विश्व की सबसे लम्बी वृक्ष का उदाहरण है।

ANGIOSPERM - जड़, पत्ती, फूल, फल, बीज (फूल के अन्दर) सभी पूर्ण विकसित होते है।

ANGIOSPERM
MONOCOT
DICOT
Liliaceae (लहसुन, प्याज ) Cruciferae - मूली, शलगम, सरसों
Palmae (ताड़, नारियल) malvaceae - कपास, भिण्डी, गुड़हल
Graminaceae (गेहूँ, चावल) Leguninaceae - बबूल, इमली, दलहन
Solanaceae आलू, बैंगन, मिर्च

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जन्तु समुदाय में समायोजन की प्रक्रिया


1 . किसी भी प्रकार की प्रजाति समूह में रहकर अपने आस्तित्व को बनाए रखने का प्रयास करती है।
2 . Flight उच्चस्तर के समायोजन की प्रक्रिया में प्रजाति उड़ने की क्षमता विकसित कर लेते है।
3 . Migration (प्रवसन)

Migration
Artic Term (Sea Bird ) : Artic Region
- शीत ऋतु के समय  Breeding के लिए अंटार्कटिका की ओर पलायन कर जाते है।

4. Camoflauge - जीव परमक्षी से बचने के लिए शरीर के अंग या स्वरूप को परिवर्तित कर लेते हैं।

Camoflauge

  • Chameleon
  • Zebra
  • Polar Bear

5. Hibernation – Hibernation के द्वारा शीट ऋतु के समय या प्रतिकूल प्राकृतिक दशाओं के होने पर जीव अपने BMR को अत्यन्त कम कर लेते हैं।

6. Big Appearance - परमक्षी से बचने के लिए कई बार जीव अपने शरीर के आकार को अपेक्षाकृत बड़ा कर लेते हैं।

7. Resource Management - मरुस्थलीय क्षेत्र में जहाँ जल की अभाव होता हैं वहाँ जल का प्रबन्धन के लिए ऊँट अपने कुबड़ में वसा के साथ जल को संग्रहित करते हैं।

उदाहरण - Bacterial Camel ∩_∩ इसमें दो Hump होते हैं।
20oC – 100oC तक के तापमान में समायोजन की क्षमता रखते हैं।

8. आक्रमण (Attack) आक्रमण करके भी जीव परमक्षी से अपने आप को सुरक्षित करने का प्रयास करते हैं।

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Megaphytes की अपेक्षा PS की दर कम होने के कारण जैवभार और उत्पादकता भी कम हो जाती हैं।
=> Oak, Elm, Poplar, Birch, Willow

साइबेरियन तुल्य जलवायु प्रदेश [25 cm – 50 cm]


  • शंकुधारी वन (GYMNOSPERM)
    • MICROPHYTES

हिमवर्षा से समायोजन के लिए शाखाएँ नीचे की ओर झुकी होती हैं। वन बायोम के क्षेत्रों में यहाँ का तापमान सबसे कम होने के कारण प्रकाश संश्लेषण का दर भी कम होता हैं। इसलिए सभी वनों में यहाँ की जैविक विविधता ओर सहानता सबसे कम होती हैं।

शंकुधारी वन के वैसे क्षेत्र जहाँ Podzol मिटटी की मोटाई कम होने के साथ हिमगलन के कारण जल भराव भी होता हैं वहाँ की वनस्पति को Bareal वन कहते हैं जहाँ माइक्रोफाइट के साथ क्रायोफाइट भी मिलते हैं

टुण्ड्रा जलवायु प्रदेश


अधिकांश समय तापमान 0o से कम रहता हैं यहाँ का सबसे गर्म महीने का तापमान भी 10oC अधिक नहीं हो पाता हैं। यहाँ Glyozation के द्वारा टुण्ड्रा मिटटी का विकास होता हैं। यहाँ लाइकेन और मांसेस की प्रजाति मिलते हैं इसलिए टुण्ड्रा बायोम में वनस्पति की जैव विविधता, जैवभार व सहानता सबसे कम होती हैं। इसमें Polar Bear , Musk Ox , Polar Hare, Polar Deer & Harp Seal moving ice पर ही रहते हैं।

स्टेपी जलवायु प्रदेश  - 50-70 cm वर्षा / (Chernozem, Pteridium - घास)


स्टेपी बायोम की प्राकृतिक दशाएं कृषि के लिये अनुकूल होने के कारण विश्व के अधिकांश घास बायोम में भूमि का उपयोग कृषि कार्यो के लिये किया जाता हैं।

सवाना तुल्य

  • 60-100 cm वर्षा
  • रेड चेस्टनट
  • वृक्ष + घास बाओब (Baobob )

सवाना बायोम में शाकाहारी जीवों की संख्या सबसे अधिक होती हैं जो परमक्षी से बचने के लिये सामान्यतः तेज गति से दौड़ने के लिये अनुकूलित होते हैं 'एवं' करने में सक्षम होते हैं।

मरुस्थलीय


इस जलवायु प्रदेश के वनस्पति अधिक तापमान और शुष्कता के साथ अपने आप को समायोजित करते हैं इसलिए पत्तियाँ अत्यन्त छोटी या कांटो में परिवर्तित हो जाती हैं, जड़े रेशेदार होने के साथ अधिक क्षेत्रों में विस्तृत होती हैं। यहाँ समायोजन वाष्पोतसर्जन को कम करने के लिये होता हैं, यहाँ वनस्पति को जीरोफाइट कहते हैं।

जलीय पा. तंत्र (Aquatic Ecosystem)


Fresh Water Ecosystem (स्वच्छ जल) (5% से कम PPM )


Barkish Water Ecosystem (खारा जलीय पा.)  (5% - 35% ppm)


Marine Water Ecosystem (तंत्र समुंद्री पा. तंत्र) (35% से भी अधिक लवणता)

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Nuistone के वनस्पति और जीवों का जलीय सतह के साथ वायुमण्डल से भी संपर्क होता हैं। यहाँ के वनस्पति प्रकाश संरलेषण के लिये वायु और जल दोनों से CO2 को प्राप्त करते हैं। Nuistone के वनस्पति के जड़ो के साथ Periphytone के जीव मिलते हैं। Nuistone और Periphytone के जीव सभी जलीय पा. तंत्र में नहीं मिलते जबकि प्लवक (Plankton) सभी प्रकार के जलीय पा. तंत्र में मिलते हैं जो छिछले जलीय भाग में तैरते हैं।

Necton के जीव गहरे जलीय भाग में मिलते हैं जो अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली होते हैं इनमें तैरने की क्षमता होती हैं जिसके कारण जलधाराओं की विपरित दिशा में भी तैरकर अनुकुल प्राकृतिक प्रदेश की ओर चले जाते हैं।

Benthos जीव अधिक गहराई में महासागरीय नितल के समीप मिलते हैं इन्हे पोषक तत्वों की प्राप्ति सूक्ष्मजीवों के द्वारा कार्बनिक पदार्थो के विधटन से होती हैं।

जलीय पा. तंत्र की उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारक

सौर प्रकाश

जल में घुले हुए ऑक्सीजन की मात्रा

तापमान

जल की पारदर्शित

जल की पारदर्शित सौर प्रकाश की उपलब्धता को निर्धरित करते हैं जल के अधिक पारदर्शी होने पर सौर प्रकाश लगभग 200cm की गहराई तक प्रवेश कर जाते हैं। सौर प्रकाश की उपलब्धता के आधार पर जलीय पा. तंत्र को Photic और Aphotic Zone में सीमांकित किया जाता हैं।

  • Photic Zone में सौर प्रकाश की उपलब्धता के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से O2 का उतसर्जन होता हैं।
  • Aphotic Zone में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया नहीं होती हैं केवल श्वसन की क्रिया के द्वारा समुद्री जीव कार्बनिक पदार्थो का विघटन कर पोषक तत्वों को प्राप्त करते हैं।

ऑक्सीजन की उपलब्धता


जल में ऑक्सीजन की अनुकुलतम उपलब्धता = 0.0010% , i.e. 10 ppm
तापमान × ऑक्सीजन की उपलब्धता

तापमान में वृद्धि के साथ सूक्ष्मजीवो की गतिविधियों अधिक होने पर O2 की माँग में वृद्धि के कारण जल में घुले हुए ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आती है जब ऑक्सीजन की मात्रा 3 - 5 ppm से कम हो जाती है तब जलीय पा. तंत्र की उत्पादकता में कमी आने पर पा. तंत्र के असंतुलित होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

T × ऑक्सीजन (जब प्रकाश संश्लेषण)
T × 1 / ऑक्सीजन  (जब सूक्ष्मजीवो की गतिविधियां )

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