प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (भूगोल) - भूकम्प शास्त्र, मिट्टटी

Civil Services Preliminary Examination
General Studies Paper - 1
भूगोल (Geography)


PHYSICAL GEOGRAPHY

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पृथ्वी की आंतरिक परतों से उत्पन्न होने वाले बल को अंतर्जातबल कहते हैं।

पृथ्वी की आंतरिक संरचना से संबंधित किये गये अध्ययन

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भूकंप पर आधारित अध्ययन


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भूकंप शास्त पर आधारित अध्य्यन के अन्तर्गत भूकंपीय तरंगो की विशेषताओं का वर्णन कर पृथ्वी की आंतरिक संरचना को स्पष्ट करने का प्रयास किया है, चूकि तरंग की गति का पदार्थ के घनत्व से सीधा सम्बन्ध होता है। इसलिए ही सतह से अंदर की परतो  में चलने वाले या गमन करने वाली P या S तरंग की गति में होने वाली वृद्धि के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि पृथ्वी के अन्दर के परतो का घनत्व सतह की अपेक्षा अधिक होता है। समान रासायनिक संरचना और संगठन से निर्मित परतो में तरंग का मार्ग सीधा होता है वही भूकम्पीय तरंगो के वक्रकार मार्ग के कारण यह भी स्प्ष्ट हो गया कि विभिन्न रासायनिक संरचना और संगठन से निर्मित परतो में अन्दर कि और जाने पर घनत्व में वृद्धि होती है   

मिट्टटी


अनाच्छादन बहिजर्मित सूसचनल से संबधित एक ऐसा सयुंक्त प्रक्रम है जिसके अन्तर्गत सर्वप्रथम मौसम में परिवर्तन के कारण अपक्षयन के द्धारा चटटानी संरचना का विघटन और वियोजन होता है। इस प्रक्रिया से चटटान असंघटित होकर अवसादों में परिवतिर्त होते है जिससे अन्ततः मिट्टटी का या मृदा का विकास होता है वही जब असंगठित अवसादों का अपरदन के कारको के द्धारा स्थानांतरण के समय भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन होता है तो उसे अपरदन कहते है जो एक प्रकार की गत्यात्मक प्रक्रिया है

पर्वतीय क्षेत्रो में गुरुत्वाकर्षण के बल के प्रभाव से असंगठित अवसादों का स्थानान्तरण के समय होने वाले अपरदन को व्रहद क्षरण कहते है जिसके लिए अपरदन के कारको का होना आवश्यक नहीं है।



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