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सामान्य अध्ययन: आधुनिक भारत का इतिहास - अंग्रेजों की भारत विजय (भाग - 1)

आधुनिक भारत का इतिहास

अंग्रेजों की भारत विजय (British Conquest in India)
(भाग - १)

http://www.iasplanner.com/civilservices/images/Modern-Indian-History.pngअंग्रेजों की भारत विजय के सन्दर्भ में विभिन्न विद्वानों द्वारा मुख्यतः दो मत प्रस्तुत किये जाते है । प्रथम मतानुसार, यह विजय निरुद्देश्य आकस्मिक एवं अनभिप्रेरित थी। इस मत के प्रणेताओ का मुख्य तर्क यह है कि ईस्ट इंडिया कंपनी एक व्यापारिक कंपनी थी, जो राजनीतिक महत्वकांक्षाओ से बहुत दूर थी । इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार करना था । किन्तु संयोगवश यहाँ की राजनितिक परिस्तिथियों ने उन्हें भारतीय राजनितिक संघर्ष कि लिए प्रेरित किया । परिणामस्वरूप वे भारतीय राज्यों से युद्ध कर उनका विलय करने के लिए बाध्य हो गए । उन्हें अपनी व्यापरिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ती एवं अपने व्यक्तित्व हितों की सुरक्षा के लिए भी यहाँ की क्षेत्रीय शक्तियों से युद्ध करना पड़ा ।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी) - बायोम, पारिस्थितिकी संरचना एवं क्रियाशीलता

सामान्य विज्ञान (General Science)
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Environment and Ecology)

पर्यावरण, बायोम, पारिस्थितिकी संरचना

 

परि + आवरण

  • हमारे चारों ओर का तरफ का वातावरण
  • हम और हमारे चारों तरफ के वातावरण को पर्यावरण कहते है।
  • जैविक और अजैविक घटकों से निर्मित वातावरण को पर्यावरण कहते है।
  • जैविक और अजैविक घटकों से निर्मित वातावरण जिसका मानव एक महत्वपूर्ण घटक होता है।

पर्यावरण के प्रकार

1. प्राकृतिक पर्यावरण - मानव हस्तक्षेप रहित - जैसे कि, अण्डमान निकोबार के जंगल।
2. आर्थिक पर्यावरण - इसमें मानव की आर्थिक क्रियाओ का अध्ययन किया जाता है। प्राकृतिक पर्यावरण को ही संशोधित कर दिया जाता है, आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।

सामान्य अध्ययन (सामान्य विज्ञान) - यांत्रिकी (न्यूटन के गति के नियम - Newton's Laws of Motion)

सामान्य विज्ञान (General Science)
यांत्रिकी (Mechanics)

न्यूटन के गति के नियम (Newton's Laws of Motion)

गति का प्रथम नियम (First Law of Motion)


जड़त्व का नियम (Law of Inertia): "यदि कोई व्यक्ति स्थिर अवस्था (विराम की अवस्था) में है तो वह स्थिर अवस्था में ही रहेगी और यदि वस्तु एकसमान गति की अवस्था में तो वह समान रूप से गतिशील ही रहेगी, जब तक कि उस वस्तु पर कोई बाह्य बल कार्यरत न हो।" वस्तु के विरामावस्था में रहने या एकसमान वेग से गतिशील रहने की प्रवृति अथार्त अपनी मूल अवस्था को बनाये रखने की प्रवृति को जड़त्व (Inertia) कहा जाता है।

जड़त्व के कुछ उदाहरण

1.जब कोई गाड़ी विरामावस्था से अचानक चलना शुरू करती है, तो इसमें बैठे यात्री जड़त्व के कारण अपनी विरामावस्था की स्थिति को पूर्ववत रखना चाहते है किन्तु गाड़ी के अचानक गतिक अवस्था में ही आते ही यात्री पीछे की ओर झुक जाते है।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (सामान्य विज्ञान) - यांत्रिकी (वृत्तीय गति - Circular Motion)

सामान्य विज्ञान (General Science)
यांत्रिकी (Mechanics)

वृत्तीय गति (Circular Motion)गति (Motion)

वृत्तीय गति (Circular Motion): ' जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है तो इसे वस्तु की वृत्तीय गति कहा जाता है।"

एकसमान वृत्तीय गति - (Uniform Circular Motion): "जब कोई वस्तु एक निश्चित बिन्दु को केन्द्र मानकर उसके चारो ओर वृत्तीय पथ पर समान चाल(constant speed) से गति करती है तो उसकी गति एकसमान वृत्तीय गति कहलाती है।"

कोणीय विस्थापन (Angular Displacement) : "जब कोई कण वृत्ताकार मार्ग पर गति करता है तो अपनी प्रारम्भिक स्थिति   के सापेक्ष, कण जितने कोण से घूम जाता है उसे कोणीय विस्थापन कहा जाता है।

  • कोणीय विस्थापन एक सदिश राशि होती है।
  • कोणीय विस्थापन का मात्रक 'रेडियन' (Radian) होता है।

हिंदी में आईएएस पाठ्यक्रम: यूपीएससी मुख्य परीक्षा

आईएएस मेंस एग्जाम सिलेबस

यूपीएससी मुख्य परीक्षा का उद्देश्य अभ्यर्थियों के शैक्षिक कौशल और उनकी क्षमता को उनके ज्ञान को एक सटीक और उचित तरीके से बताए जाने का आकलन करना है। मुख्य परीक्षा में उनकी जानकारी और स्मृति की जगह उनके सामान्य बौद्धिक व्यक्तित्व और उम्मीदवारों की समझ की गहराई का विश्लेषण करना है।

यूपीएससी ने 2017 सिविल सेवा परीक्षा के लिए तारीख की घोषणा की है। इस वर्ष की प्रारंभिक परीक्षा 18 जून 2017 को आयोजित की जाएगी और मुख्य परीक्षा 28 अक्टूबर 2017 को होगी। पाठ्यक्रम में कोई बदलाव नहीं है। मुख्य परीक्षा मौजूदा पाठ्य-सूची के साथ नौ पत्रों के साथ जारी रहेगी।

आईएएस मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम: जीव विज्ञान (वैकल्पिक विषय)

आईएएस मेन एग्जाम सिलेबस

जीव विज्ञान (वैकल्पिक विषय)

 

पेपर - I


Non-Chordata और Chordata

(A) उप-वर्गीकरणों तक वर्गीकरण और विभिन्न फ़ाइलाओं का संबंध: एकोलोमेट और कोलोमेट, प्रोटोटोम्स और ड्यूटोरोस्टोम्स, बिलेटिया और रेडियेट; प्रोटिस्टा, पैराोजोआ, ओनिकॉफ़ोरा और हेमिक्र्डटा की स्थिति; सममिति
(B) प्रोटोजोआ: लोकोमोशन, पोषण, प्रजनन, लिंग; सामान्य सुविधाओं और पैरामाइअम, मोनोसिस्टिस, प्लॉस्डियम और लीशमैनिया का जीवन इतिहास।
(C) पोरिफेरा: कंकाल, नहर प्रणाली और प्रजनन।
(D) सीनिडारिया: बहुरूपता, रक्षात्मक संरचनाएं और उनके तंत्र; प्रवाल भित्तियों और उनके गठन; मेटाजेनेसिस; सामान्य सुविधाओं और Obelia और ऑरलिया के जीवन का इतिहास
(E) प्लेटिहेल्मंट्स: परजीवी अनुकूलन; सामान्य लक्षण और फ़ैसियोला और तैनिया के जीवन इतिहास और उनके रोगजनक लक्षण

आईएएस मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम: लोक प्रशासन (वैकल्पिक विषय)

आईएएस मेन एग्जाम सिलेबस

लोक प्रशासन (वैकल्पिक विषय)

 

पेपर - I


प्रशासनिक सिद्धांत

परिचय: लोक प्रशासन का अर्थ, दायरा और महत्व; लोक प्रशासन की विल्सन की दृष्टि; अनुशासन का विकास और इसकी वर्तमान स्थिति; नया लोक प्रशासन; सार्वजनिक विकल्प दृष्टिकोण; उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण की चुनौतियां; सुशासन: अवधारणा और अनुप्रयोग; नया सार्वजनिक प्रबंधन।

प्रशासनिक विचार: वैज्ञानिक प्रबंधन और वैज्ञानिक प्रबंधन आंदोलन; शास्त्रीय सिद्धांत; वेबर के नौकरशाही मॉडल - इसकी आलोचना और पोस्ट-वेबरियन विकास; गतिशील प्रशासन (मैरी पार्कर फोल्लेट); मानव
रिलेशंस स्कूल (एल्टन मेयो और अन्य); कार्यकारी (सी। आई। बर्नार्ड) के कार्य; साइमन के निर्णय लेने वाले सिद्धांत; साझेदारी प्रबंधन (आर। लिकर्ट, सी। अरगीरिस, डी। मैकग्रेगर)।

आईएएस मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम: भौतिक विज्ञान (वैकल्पिक विषय)

आईएएस परीक्षा पाठ्यक्रम

भौतिक विज्ञान (वैकल्पिक विषय)

 

पेपर - I


(क) कणों की यांत्रिकी: गति के नियम; ऊर्जा और गति का संरक्षण, घूर्णन फ्रेम, केन्द्रापसारक और कोरिओलिस त्वरण के लिए आवेदन; एक केंद्रीय बल के तहत गति; कोण गति का संरक्षण, केपलर के कानून; फ़ील्ड और क्षमताएं; गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र और गोलाकार निकायों, गॉस और पॉसॉन समीकरणों के कारण संभावित, गुरुत्वाकर्षण आत्म-ऊर्जा; दो-शरीर की समस्या; कम द्रव्यमान; रदरफोर्ड बिखरने; द्रव्यमान और प्रयोगशाला संदर्भ केंद्र फ्रेम

(बी) कठोर निकायों की यांत्रिकी: कणों की प्रणाली; द्रव्यमान का केंद्र, कोणीय गति, गति के समीकरण; ऊर्जा, गति और कोणीय गति के लिए संरक्षण प्रमेयों; लोचदार और असहनीय टक्कर; कठोर शरीर; स्वतंत्रता की डिग्री, यूलर के प्रमेय, कोणीय वेग, कोणीय गति, जड़ता के क्षण, समानांतर और सीधा अक्ष के प्रमेय, रोटेशन के लिए गति का समीकरण; आणविक रोटेशन (कठोर निकायों के रूप में); डी और त्रि-परमाणु अणुओं; प्रेरक गति; शीर्ष, जीरोस्कोप

General Studies (Medieval Indian History) - Political Conditions, Trade, Society, and Education (800 - 1200 AD)

EARLY MEDIEVAL INDIA (800 - 1200 AD)


The Age of Conflict (1000 – 1200 AD)

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Religious Movements and Beliefs (8020 – 1200 AD)


Buddhism: Buddishm was gradually confined to eastern India. The Pala rulers were patrons of Buddhism and with their decline, Buddhism lost royal patrongae. The rise of Mahayanism and its deviation from the teachings of the Buddha aslo contributed in certain measure to the decline of Buddhism. The Palas patronized Mhayana from of Buddhism.

Jainism: jainism continued to be popular, particulary among the trading communities. The Chalukyan ruler of Gujarat patronized Jainism and built the Dilwara temple at mount Abu and many other Jain temples. The Paramara rulers of Malwa also built many huge images of Jain saints and Mahavira was worshiped as a god. In South India, Jainism attained its high water mark during the 9th and 10th centuries and the Ganga rules of Karnataka were great patrons of Jainism. The statue of Gomateswara in Sravanabelagola made of granite was built in this time. In course of time, the growing rigidity of Jainism and the loss of royal patronage led to the decline of Jainism.

Hinduism: there was a revival and expansion  of Hinduism and it took many forms. Shiva and Vishnu became the chief gods. Many local gods and goddesses incuding those of tribals became Hinduized. In eastern India, the consorts – Tara, the consort of Buddha, Durga the consort of Shiva, themselves became the chief objects of worship. There was a process of cultural synthesis and in an era of lotical disintegratin, religion played a positive part, But the religious revival also  increased the power of the brahmins which resulted in a series of popular movements which emphasized the element of human equality and freedom, such as Tantrm, Bhakti movement and Virshaivism.

सामान्य अध्ययन (आधुनिक भारत का इतिहास) - भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन

आधुनिक भारत का इतिहास

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन
Arrival of European Companies in India

पुर्तगालियों का भारत आगमन


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/Modern-Indian-History.pngभारतीय इतिहास में व्यापर - वाणिज्य की शुरुआत हड़प्पा काल से मानी जाती है । भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक संम्पन्नता, आध्यात्मिक उपलब्धियां, दर्शन, कला आदि से प्रभावित होकर मध्यकाल में बहुत से व्यापारियों एवं यात्रियों का यहाँ आगमन हुआ । किन्तु 15वीं शताब्दी के उत्तरार्ध एवं 17वी शताब्दी के पूर्वार्ध के मध्य भारत में व्यपार के प्रारंभिक उद्देश्यों से प्रवेश करने वाली यूरोपीय कंपनियों ने यहाँ की राजनितिक, आर्थिक तथा सामाजिक नियति को लगभग 350 वर्षो तक प्रभावित किया । इन विदेशी शक्तियों में पुर्तगाली प्रथम थे । इनके पश्चात डच अंग्रेज डेनिश तथा फ्रांसीसी आये । डचों के अंग्रेजो से पहले भारत आने के बावजूद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना डच ईस्ट इंडिया कंपनी से पहले हुई ।

General Studies (Medieval Indian History) - The Age of Conflict (1000 – 1200 AD)

EARLY MEDIEVAL INDIA (800 - 1200 AD)


The Age of Conflict (1000 – 1200 AD)http://www.iasplanner.com/civilservices/images/Medieval-Indian-History.png

The Ghaznavids


Alaptgin: The Samanid Empire ruler by people of Iranian descent in areas of Transoxiana, Kharasan and Parts of Iran had many Turkish  slaves who acted as governors One such Turkish slave who rose to the position of a Samanid governor was Alaptgin. He in course of time established and idnependet kingdom with its capital as Ghazni. The Samanid kingdom soon ended and the Ghanznavids took over the task of defending the Islamic lands form the Central Asian tribesmen. Alaptgin alos came into conflict with the Hindushahi rulers who ruled in areas of Afghanistan to Punjab with their capital at Walihind (Ohinda).

IAS Prelims: General Studies (Medieval Indian History) - The Tripartite Struggle: 8th to 10th Centuries

EARLY MEDIEVAL INDIA (800 - 1200 AD)


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/Medieval-Indian-History.pngThe Tripartite Struggle: 8th to 10th Centuries

Between 750 AD and 1000 AD three empires dominated the political scene in India. These were the  Palas who dominated eastern India till the middle of the 9th century; the Pratiharas who dominated the western part of India and the upper gangetic valley till the middle of the 10th century, and the Rashkrakuta empire, which dominated the deccan and also controlled the territory in north and south India at various times. They were involved in conflict among themselves, but provided stable conditions of life over large areas and gave patronage to arts and letters of the three, the rashtrakuta empire lasted the longest, it was also the most powerful empire of the three and acted as a bridge between north and south India in economic as well as cultural matters.

Palas: Ruled in areas of Bihar and Bengal with  capital at Mongyr (Munger).

Gopala: The death of Sasanka of Gauda created anarchy and confusion in Bengal, whereupon the notable men of Bengal elected Gopala as King in 750 AD. Gopala thus set up the pala Kingdom. Gopala was an ardent Buddhist and set up the Odantapuri Vihar (modem Bihar Sharif).

Dharmpala: Gopala was succeeded by his son Dharampala. Dharampala was defeated by the Rashktrakuta ruler Dhruva –III who also defected the Pratihara ruler vatasraja. But, Dhruva returned to the Deccan were upon Dharampala accupied Kannauj but could not consolidate his control over it as Pratihara power revived under Nagabhata II who defeted Dharampala near Mongyr.

Devapala: The son of Daharmpala succeeded him. He extended control over Prayag jyotispur (Assam) and also part of Orissa and probably during his reign, some part of Vihara at Nalanda was constructed by Balaputradev, a Sailendera ruler of Sumitra, Java and Malaya.

आईएएस मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम: इतिहास (वैकल्पिक विषय)

आईएएस परीक्षा पाठ्यक्रम

इतिहास (वैकल्पिक विषय)

मुख्य परीक्षा के लिए इतिहास के पाठ्यक्रम में दो पत्र हैंI पेपर 1 में प्रारंभिक प्राचीन इतिहास से  अठारहवीं शताब्दी तक कवर किया जाता है। पेपर 2 यूरोपीय प्रवेश से भारत में शुरू होता है और 1990 में सोवियत संघ के विघटन के लिए पूरे आधुनिक भारतीय इतिहास को कवर करता है। पेपर 1 में 24 parts हैं, जबकि पेपर II के 27 parts हैं। दिए गए इतिहास  पाठ्यक्रम I और II का विस्तृत वर्णन है:

आईएएस मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम: भूगोल (वैकल्पिक विषय)

आईएएस परीक्षा पाठ्यक्रम

भूगोल (वैकल्पिक विषय)

यह सिलेबस  सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के भूगोल - Geography (वैकल्पिक विषय) का है और इसमें 2 पेपर शामिल हैं। 500 अंकों के साथ प्रत्येक पेपर 250 अंकों का है।

पेपर - I : भूगोल के सिद्धांत


भौतिकी भूगोल: भू-आकृति विज्ञान: भूमि के विकास को नियंत्रित करने वाले कारक; एंडोजेनेटिक और एक्सोजेनेटिक बलों; पृथ्वी की परत की उत्पत्ति और विकास; भौगोलिकतावाद की बुनियादी बातें; पृथ्वी के इंटीरियर की भौतिक स्थितियों; जीओसिंक्लिनिस; महाद्वीपीय बहाव; Isostasy; प्लेट टेक्टोनिक्स; पहाड़ की इमारत पर हाल के विचार; वालकैनिटी; भूकंप और सुनामी; भौगोलिक चक्र और लैंडस्केप विकास की अवधारणा; निंदा कालक्रम; चैनल आकारिकी; क्षरण सतह; ढलान विकास; एप्लाइड जियोमोर्फोलॉजी: भूहायोलॉजी, आर्थिक भू-विज्ञान और पर्यावरण

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (सा० विज्ञान) - यांत्रिकी (गति - Motion)

सामान्य विज्ञान (General Science)
यांत्रिकी (Mechanics)

गति (Motion)

विराम एवं गति (Rest and Motion): यदि कोई वस्तु अपनी स्तिथि में किसी स्थिर वस्तु के सापेक्ष समय के साथ परिवर्तन करती है तो इसे वस्तु की गति अवस्था कहा जाता है। समय परिवर्तन के साथ तथा किसी स्थिर वस्तु के सापेक्ष यदि वस्तु अपनी स्तिथि में परिवर्तन न करे तो इसे वस्तु की विराम अवस्था (Resting State) कहा जाता है।

दूरी (Distance): सरल रेखीय गति (Straight Line Motion)  करती हुई वस्तु के द्धारा तय किये गए सम्पूर्ण मार्ग की लंबाई को दूरी (Distance) कहा जाता है।

विस्थापन  (Displacement): किसी वस्तु की अंतिम स्तिथि तथा प्रारंभिक स्तिथि के बीच की न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते है।

आईएएस मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम: कृषि (वैकल्पिक विषय)

आईएएस परीक्षा पाठ्यक्रम

कृषि (वैकल्पिक विषय)

यह सिलेबस  सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के एग्रीकल्चर  (वैकल्पिक विषय) का है और इसमें 2 पेपर शामिल हैं। 500 अंकों के साथ प्रत्येक पेपर 250 अंकों का है।

पेपर - I


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/Agriculture.pngपारिस्थितिकी और मनुष्य, प्राकृतिक संसाधनों, उनके स्थायी प्रबंधन और संरक्षण के लिए इसकी प्रासंगिकता। फसल वितरण और उत्पादन के कारकों के रूप में शारीरिक और सामाजिक वातावरण। कृषि पारिस्थितिकी; वातावरण के संकेतक के रूप में फसल का पैटर्न पर्यावरण प्रदूषण और फसलों, जानवरों और मनुष्यों के लिए संबंधित खतरों जलवायु परिवर्तन - अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और वैश्विक पहल ग्रीन हाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग पारिस्थितिक तंत्र विश्लेषण के लिए अग्रिम उपकरण - रिमोट सेंसिंग (आरएस) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस)।

सामान्य अध्ययन (प्राचीन भारतीय इतिहास) - सिन्धु घाटी की सभ्यता - भाग - १

प्राचीन भारतीय इतिहास: सिन्धु घाटी की सभ्यता (Indus Valley Civilization)


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngसिन्धु घाटी की सभ्यता का उद्धभव काल में भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में हुआ था, जो वर्तमान में।भारत, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान के कुछ क्षेत्रों में अवस्थित है। इस काल की सभी संस्कृतियों में सैन्धव सभ्यता सबसे विकसित, विस्तृत और उन्नत अवस्था में थी। इसे हड़प्पा सभ्यता (harappan civilization ) भी कहते है क्योंकि सर्वप्रथम 1921 ई. में हड़प्पा नामक स्थान से ही इस संस्कृति के सम्बन्ध में। जानकारी मिली थी। सैन्धव सभ्यता अनुकूलता के मध्य उत्पन्न हुई थी जिसका ज्ञान उत्खनन एवं अनुसन्धान द्धारा होता है। सैन्धव सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी, क्योंकि इसके पुरातात्विक अवशेषों से परिवहन, व्यापार, तकनीकी, उत्पादन, एवं नियोजित नगर व्यवस्था के तत्व प्राप्त होते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (सा० विज्ञान) - यांत्रिकी (मापन - Measurement)

सामान्य विज्ञान (General Science)
यांत्रिकी (Mechanics)

मापन (Measurement)

भौतिक राशियां (Physical Quantities)


किसी द्रव्य की सही स्तिथि या उचित मात्रात्मक स्तिथि को दर्शाने के लिए भौतिकी के जिन पदों का उपयोग किया जाता है, भौतिक राशियां कहलाती है। उदाहरण - द्रव्यमान (Mass), लंबाई (Height), समय (Time) आदि।

भौतिक राशियां दो प्रकार की होती हैं:
१. अदिश राशियां (Scalar Quantities)
२. सदिश राशियां (Vector Quantities)

1. अदिश राशियां (Scalar Quantities): वे भौतिक राशियां, जिन्हें व्यक्त करने के लिए केवल भौतिक परिमाण (magnitude) की आवश्यकता होती है, अदिश राशियां कहलाती हैं। उदाहरण: द्रव्यमान (Mass), दूरी (Distance) चाल (Speed) आयतन (Volume) घनत्व (Density) कार्य (Work) शक्ति (Power) ऊर्जा (Energy) आदि।

2. सदिश राशियां (Vector Quantities): वे भौतिक राशियां, जिन्हें व्यक्त करने के लिए परिमाण (Magnitude) के साथ साथ दिशा (Direction) की भी आवश्यकता होती है, सदिश राशियां कहलाती है । उदाहरण: विस्थापन (Displacement) वेग (Velocity) त्वरण (Acceleration) संवेग (Momentum) आवेग (Impulse) वैधुत क्षेत्र (Electric Field) आदि।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (भूगोल) - चट्टान (ROCKS)

Civil Services Preliminary Examination
General Studies Paper - 1
भूगोल (Geography)


PHYSICAL GEOGRAPHY

चट्टान (ROCKS)

खनिज तत्वों के मिश्रण से निर्मित ठोस को चट्टान कहते हैं।


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प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (भूगोल) - भूकम्प शास्त्र, मिट्टटी

Civil Services Preliminary Examination
General Studies Paper - 1
भूगोल (Geography)


PHYSICAL GEOGRAPHY

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पृथ्वी की आंतरिक परतों से उत्पन्न होने वाले बल को अंतर्जातबल कहते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (अर्थव्यवस्था) - प्रस्तावना (Budget 2016-2017)

बजट (Budget) 2016 - 2017

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प्रस्तावना

  • बजट सरकार की राजकीषीय (Fiscial Polity) नीति का परिवायक होता है। इसके माध्यम से सरकार विभिन्न प्रकार के सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की कोशिश करती है। (Art 47)
  • उपर्युक्त के आलावा बजट राजकोषीय मामलों में पारदशिर्ता और जबाबदेही लाता है। बजट नियोजन का एक महत्वपूर्ण उपकरण होता है।
  • बजट आने वाले वर्ष के लिए (coming Year) प्रस्तुत किया जाता है। बजट में निम्नलिखित तीन प्रकार के आकड़ो को प्रस्तुत किया जाता है।

यदि 2016 - 17 के बजट को ध्यान में रखा जाए तो:

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (प्राचीन भारतीय इतिहास) पाषाण युग की संस्कृति व जीवन-शैली - भाग - २

भारतीय इतिहास: पाषाण युग की संस्कृति व जीवन-शैली
(Culture or Lifestyle of the Stone Age)


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngमध्यपाषाण काल: जीवन शैली (Mesolithic Age : Lifestyle)

परिवर्तन (Changes)


मध्यपाषाण काल का आरंभ ई. पू. 8000 के आसपास हुआ। जलवायु गर्म व शुष्क हो गई। जलवायु परिवर्तन के साथ ही पेड़-पौधे और जीव- जंतुओ में भी परिवर्तन हुए और मानव के लिए नए क्षेत्रों की ओर अग्रसर होना सभंव हुआ।

  • यह पुरापाषाण काल और नवपाषाण काल के बीच का सक्रमण काल है।
  • मध्यपाषाण काल के मानव शिकार करके मछली पकड़कर और खाध वस्तुएँ एकत्रकर अपना पेट भरते थे तथा आगे चलकर वे पशुपालन भी करने लगे । इनमे शुरू के तीन पेशे तो पुरापाषाण काल से ही चले आ रहे थे पर अंतिम पेशा नवपाषाण संस्कृति से जुड़ा है।
  • अब न केवल बड़े बल्कि छोटे जानवरो का भी शिकार होने लगा।
  • औजार बनाने की तकनीक में परिवर्तन हुआ और छोटे पत्थरो का उपयोग किया जाने लगा।
  • इस काल के महत्वपूर्ण हथियार थे - इकधार फलक (Backed Blade) , बेघनी (Points), अर्ध चन्द्रकाल (Lunate) तथा समलम्ब (Trapeze) ।
  • महत्वपूर्ण स्थल: वीरभारपुर (पश्चिम बंगाल), लधनाज (गुजरात), टेरी समूह (तमिलनाडु), आदमगढ़ (म. प्र.), बागोर (राजस्थान), महादहा, सरायनहरराय (उ. प्र.) ।
  • इस काल में सामाजिक - आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। जनसँख्या में वृदि हुई और आखेट की सुगमता से मनुष्य अब छोटी- छोटी टोलियो में रहने लगा। स्थाई निवास की परंपरा शुरू हुई। पशुपालन एवं कृषि की शुरुआत हुई और मिटटी के बर्तन बनने लगे।

सिविल सेवा परीक्षा के लिए उपयोगी हिंदी समाचार पत्र।

The Hindu Newspaper

Best Hindi Newspapers for IAS Exam


यह अर्टिकल सभी आईएएस उम्मीदवारों के लिए उपयोगी होगा जो कि हिंदी माध्यम में सिविल सेवाओं की परीक्षा मे भाग लेंगे। इस पोस्ट में हम आपको आईएएस / आईपीएस / आईआरएस / आईएफएस-यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी के लिए सर्वश्रेष्ठ हिंदी समाचार पत्रों के बारे में बतायेंगे और ये हिंदी अखबार आपको आपकी आईएएस परीक्षा की तैयारी अवश्य में मदद करेंगे।

तथ्य यह है कि हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के लिए आपको शायद ही कोई हिंदी अखबार मिलेगा जो द हिंदू अखबार के मानक और गुणवत्ता से मेल खा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप आईएएस में अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों से पीछे कहीं हैं। यह कह कर हमारा सिर्फ़ यह मतलब है कि बाजार में ऐसा कोई अख़बार नहीं है जो आपको ’द हिंदु’ जैसी सभी जगहों से जुडी सभी महत्वपूर्ण खबर देगा। आईएएस परीक्षा तैयार करने के लिए आपको दो से अधिक हिंदी अखबारों को पढ़ना होगा। इसलिए मौजूदा मामलों की बात करते समय यह हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए थोड़ा थकाऊ है। सभी हिंदी समाचार पत्रों में सबसे सनसनीखेज सुर्खियां आसानी मिलेंगी लेकिन यदि हम यूपीएससी के मापदण्डों की बात करें तो यह बिल्कुल अलग है।

यूपीएससी में आपसे सीधे सवाल नहीं पूंछे जाते बल्कि वे आपसे कुछ भी पूंछ सकते हैं, और इसलिये आप अख़बार की सारी खबरें पढ़ने का पढ़ने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। यूपीएससी की परीक्षा के दृष्टिकोण से हिंदी अखबारों में संबंधित अध्ययन सामग्री का बहुत सीमित स्थान है और वह इसलिए है क्योंकि वे केवल उन समाचारों को प्रकाशित करते हैं जो उनके लिये उपयोगी अथवा संबंधित प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि विभिन्न स्रोतों से समाचार एकत्रित करने काम आपका है और हम आपको बताएंगे कि कैसे।

नीचे कुछ अच्छे सूचीबद्ध हिंदी समाचार पत्र हैं जिन्हें आपको आईएएस तैयारी के लिए पढ़ना चाहिए। ये हिंदी अखबार सामान्य अध्ययन Prelims Paper- 1 and Main Paper 2 & 3 की तैयारी में आपकी मदद करेंगे।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (प्राचीन भारतीय इतिहास) पाषाण युग की संस्कृति व जीवन-शैली - भाग - १

भारतीय इतिहास: पाषाण युग की संस्कृति व जीवन-शैली
(Culture or Lifestyle of the Stone Age)


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngपुरापाषाण काल : शिकारी और खाद्द संग्राहक (Palaeolithic Age: Hunters and Food Gatherers)

अपवाद स्वरूप दक्कन के पठार में मध्य पुरापाषाण काल और उच्च पुरापाषाण काल दोनों के औजार मिलते है। पुरापाषाण संस्कृति का उदय अभिनूतन युग में हुआ था। इस युग में धरती बर्फ से ढँकी हुई थी। भारतीय पुरापाषाण काल को मानव द्धारा इस्तेमाल किये जाने वाले पत्थर के औजारों के स्वरुप और जलवायु में होने वाले परिवर्तन के आधार पर तीन अवस्थाओ में बाँटा जाता है:

आईएस एग्जाम के लिए द हिन्दू व अन्य समाचार पत्र कैसे पढ़ें ?

How and What to study in "The Hindu" & other Newspapers for Civil Services Examination

The Hindu Newspaper

केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित "सिविल सेवा परीक्षा" के लिए तैयार सभी प्रतियोगियों को इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए उन्हे अपनी अध्ययन प्रणाली में कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना होता है, और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लेते ही उस यात्रा में आने वाली हर परिस्थिति में अपने लक्ष्य के अतिरिक्त कुछ आवश्यक नही होता। इसीलिये प्रतियोगी इस परीक्षा की तैयारी के लिये कई प्रकार की तणनीतियों के अंतर्गत अध्ययन करते हैं, और इस अध्ययन यात्रा का एक महत्वपूर्ण भाग है "दैनिक अखबार" (Daily Newspaper).

IAS Prelims: General Studies (Ancient Indian History) - Mauryan Period (321-184 BC)

Ancient Indian History

Mauryan Period (321-184 BC)http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.png

Archaeological Remains


(1) Use of Iron was on a more extensive scale
(2) Northern Black Polished Ware (NBPW) use continued with increase in variety number and area.
(3) Burnt bricks were used for the first time in the Mauryan period
(4) Ring well were also identified for the first time in the Mauryan Period.
(5) Even in the Mauryan period, we have no evidence of usage of gold coins. Rupyarupa and Pana were the silver coins whereas Tamarupa were the copper coins used in the Mauryan period.
(6) Many wooden palaces and halls were unearthed from the Mauryan period.

Kautilya’s Arthasastra: It is the most important Literary source of the Mauryan period. It is a book on political economy. It was written in Sanskrit ,Arthasastra was divided into 15 adhikarnas (parts). It gives us an idea of the functioning of the Mauryan state.

Megasthens’s Indica: Megasthenes was the greek ambassador of Selucus Nikator to the court of Chandragupta Maurya. His book indica is the foremost among all the foreign accounts for Mauryas.

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (प्राचीन भारतीय इतिहास) - साहित्यिक स्रोत

भारतीय इतिहास: साहित्यिक स्रोत (Literary Sources)


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngसाहित्यिक साक्ष्य के अंतर्गत साहित्यिक ग्रंथों से प्राप्त सामग्रियो का अध्य्यन किया जाता है। इन साहित्यिक साक्ष्यों को हम दो भागों में बांटते हैं:
(1) धार्मिक साहित्य तथा (2) लैकिक साहित्य

धार्मिक साहित्य में ब्राह्मण तथा ब्राह्मणेतर ग्रन्थ आते है। पुनः ब्राह्मण ग्रंथों में वेद, उपनिषद , रामायण, महाभारत, पुराण तथा स्मृतिग्रंथ आते है, जबकि ब्राह्मणेतर ग्रंथों में बौद्ध तथा जैन साहित्य का उल्लेख किया जा सकता है। इसी तरह लौकिक साहित्य में ऐतिहासिक ग्रंथों, जीवनियाँ, कल्पना - प्रधान तथा गल्प साहित्य आते है।

IAS Prelims: General Studies (Ancient Indian History) - Vedic Period 1500 BC to 600 BC

Ancient Indian History

Sources: The sources of ancient Indian history are multifaceted varying from literature to coins and inscriptions to archaeological remains.


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.png Vedic Period (1500 BC to 600 BC)

Information of the vedic period comes from vedic- literature. The scholars have divided the vedic period into the early vedic period and the later period. The only source of information which belongs to the early vedic is the Rig Veda. All the other components of the vedic literature belong to the vedic period. The vedic literature consists of the Samhitas, Aranyakas and Upanishads. There are also six vedangas and four Upa- Vedas . The samhitas are collections of hymns sung in the praise of various gods.

They are four in number:

  1. Rig Veda
  2. Sama Veda
  3. Yajur Veda
  4. Atharva Veda

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (प्राचीन भारतीय इतिहास) - पुरातत्विक स्रोत

भारतीय इतिहास: प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत


इतिहासकार एक वैज्ञानिक की भाँति उपलब्ध सामग्री की समीक्षा करके अतीत का सही चित्रण करने का प्रयास करता है। उसके लिए साहित्यिक सामग्री, पुरातात्विक साक्ष्य और विदेशी यात्रियों के वर्णन सभी का महत्व है।

http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngप्राचीन भारतीय इतिहास के अध्य्यन के लिए पूर्णत: शुद्ध ऐतिहासिक सामग्री विदेशी की अपेक्षा अल्प मात्रा में उपलब्ध है। यधपि भारत में यूनान के हेरोडोटरश या रोम के लिवी जैसे इतिहासकार नहीं हुए, अतः कुछ पाश्चात्य विद्धानों की यह मानसिक धारणा बन गई थी कि भारतीयों को इतिहास कि समझ ही नहीं थी। लेकिन, ऐसी धारणा बनाना भारी भूल होगी। वस्तुत: प्राचीन भारतीय इतिहास की संकल्पना आधुनिक इतिहासकारो की संकल्पना से पूर्णत: अलग थी। वर्तमान इतिहासकार ऐतिहासिक घटनाओ में कारण - कार्य संबंध स्थापित करने का प्रयास करते है लेकिन प्राचीन इतिहासकार केवल उन घटनाओ या तथ्यो का वर्णन करता था जिनमे आम जनमानस को कुछ सीखने को मिल सके।

IAS Prelims: General Studies (Ancient Indian History) - Periodisation & Eras

Ancient Indian History

Periodisation of Ancient Indian History


Palaeolithic Age 5,00,000 B.C. to 10,000 B.C. (i) Early or lower Palaeolithic Phase

(ii) Middle Palaeolithic Phase 50,000 B.C. to 40,000 B.C.

(iii) Upper Palaeolithic Phase 40,000 to 10,000 B.C.

Mesolithic Age 9,000 B.C. to 4,000 B.C.  
Neolithic Age 5,000 B.C. to 1,800 B.C.  
Chalcolithic Age 1,800 B.C. to 1,000 B.C.  
Iron Age Started from 1,000 B.C. onwards.  
Indus Valley Civilization (Harappan Civilization) 2,900 B.C. to 1,700 B.C. (i) Early Harappan phase 2,900 B.C. to 2,500 B.C.

(ii) Middle Harappan Phase (Mature Harappan Phase) 2,500 to 2,000 B.C.

(iii) Late Harappan Phase 2,000 B.C. to 1,700 B.C.

Vedic Period 1,500 B.C. to 600 B.C.  
Pre-Mauryan Age 6th Century B.C. to 300 A.D.  
Mauryan Age 321 B.C. to 184 B.C.  
Post-Mauryan Age 200 B.C. to 300 A.D.  
Gupta Period 4th Century A.D. to 6th Century A.D.  
Age of Harsha 606 A.D. to 647 A.D.  
Chalukyas of Badami 543 A.D. to 755 A.D.  
Pallavas of Kanchipuram 560 A.D. to 903 A.D.  

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