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Hindi Articles

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - भारतीय संविधान के स्रोत

Polity

राज्यव्यवस्था : भारतीय संविधान के स्त्रोत


हमारे संविधान के विशालतम होने के प्रमुख कारण।

  • संविधान निर्माता हर विषय को स्पष्टता के साथ रखना चाहते थे, ताकि भविष्य में विवाद कम हों।
  • भारत के संविधान में प्रांतों का संविधान भी शामिल है, जो इसे व्यापक बना देता है।
  • भारत में भाषायी बहुलता।
  • भारतीय समाज में अस्पष्यता, अनुसूची जाति / जनजाति से संबंधित परिस्थितियों ने संविधान की व्यापकता में योगदन दिया है।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - भारतीय संविधान की विशेषताएं

Polity

राज्यव्यवस्था : भारतीय संविधान की विशेषतायें


भारतीय संविधान लिखित व निर्मित है। इसका वर्गीकरण हम निम्न प्रकार से कर सकते हैं:-

(अ) लिखित : USA, India
अलिखित : Britain

(ब) निर्मित :  USA, India
विकसित : Britain

(स) कठोर / अनम्य : USA

मिश्रण → भारत

लचीला / अनम्य : Britain


प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - संविधान का परिचय व वर्णन

Polity

राज्यव्यवस्था : भारत का संविधान


संविधान उन प्रावधानों का संग्रह है, जिसके आधार पर किसी देश का शासन चलाया जाता है।

राज्यव्यवस्था (Polity)


राज्यव्यवस्था संविधान का अनुप्रयोग है जब संविधान को किसी देश में लागू किया जाता है तो संविधान को लागू करने के क्रम में जो कानून सरकार के निर्णय और संस्थायें उभर कर सामने आती हैं उन्हे सामूहिक रूप से राज्यव्यवस्था कहते हैं।

नये छात्र आईएएस परीक्षा की तैयारी कैसे करें। (Prepare IAS Exam During Graduation)

आईएएस परीक्षा की तैयारी कैसे करें।

Process, Pattern and Strategy to crack IAS Preयह तो हम सभी जानते हैं कि संघ लोक सेवा आयोग (यू०पी०एस०सी०) सिविल सेवा परीक्षा आयोजित कराता है, और यह देश की एक कठिन व प्रतिष्ठित परीक्षा है। फिर भी लाखों युवा छात्र देश के कोने-कोने से इस परीक्षा की तैयारी करते हैं और एक आई०ए०एस० अफसर बनने का सपना देखते हैं। यदि हम इस परीक्षा की प्रक्रिया व प्रकृति को देखें तो हम पायेंगे कि इस परीक्षा में सफलता पाने के लिये हमें चाहिये कि हम एक सटीक रणनीति और व्यवस्था के साथ तैयारी करें। सामान्यत: एक अभ्यर्थी यदि इस परीक्षा की तैयारी स्नातक स्तर से ही शुरू कर दें तो यह भी संभव है कि इस सेवा में जाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, और अभ्यार्थी सफलता पूर्वक इस प्रतिष्ठित सेवा में अपना भविष्य निर्धारित कर सकते हैं ।

सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam - An Introduction)

सिविल सेवा परीक्षा

परिचय: प्रतिवर्ष यू०पी०एस०सी० सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन तीन चरणों में करता है - सर्वप्रथम प्रारम्भिक परीक्षा फिर मुख्य परीक्षा तथा अंतिम चरण में अभ्यार्थी का साक्षात्कार / व्यक्तित्व परीक्षण होता है। साक्षात्कार में चयनित अभ्यार्थी अपने अर्जित किये गये अंकों व वरीयता के अनुरूप आई०ए०एस०, आई०पी०एस०, आई०एफ०एस० तथा अन्य केन्द्रीय सेवाओं (ग्रुप ए व ग्रुप बी) के लिए चयनित किये जाते हैं। देश की इस सबसे मुश्किल परीक्षा और इसमें अचूक सफलता के लिए अनुशासन, कठिन परिश्रम, अध्य्यन प्रबंधन और धैर्य ही मूलभूत अधार हैं।

संघ लोक सेवा आयोग - एक परिचय (UPSC - An Introduction)

सिविल सेवा व सिविल सेवा परीक्षा

ऐतिहासिक पृष्टभूमि: भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रवादियों ने जो राजनीतिक आन्दोलन चलाया उसकी एक प्रमुख मांग थी कि लोक सेवा आयोग में भर्ती भारत में हो, क्योंकि तब इसकी परीक्षा इंग्लैंड में हुआ करती थी। प्रथम लोक सेवा आयोग की स्थापना अक्तूबर 1926 को हुई। आज़ादी के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत 26 अक्तूबर 1950 को लोक आयोग की स्थापना हुई। इसे संवैधानिक दर्जा देने के साथ साथ स्वायत्ता भी प्रदान की गयी ताकि यह बिना किसी दबाव के योग्य अधिकारियों की भर्ती क़र सके। इस नव स्थापित लोक सेवा आयोग को संघ लोक सेवा आयोग नाम दिया गया।

मौलिक अधिकार क्या हैं | Lecture on Fundamental Rights in Hindi

मौलिक अधिकारों का अर्थ

मौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है जो व्यक्ति के जीवन के लिये मौलिक होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं और जिनमें राज्य द्वार हस्तक्षेप नही किया जा सकता। ये ऐसे अधिकार हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिये आवश्यक हैं और जिनके बिना मनुष्य अपना पूर्ण विकास नही कर सकता। ये अधिकार कई करणों से मौलिक हैं:-

मास्टर स्ट्रैटेजी : प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन - पेपर - 1 (भारतीय राज्यव्यवस्था एवं शासन)

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी कैसे करें?

मास्टर स्ट्रैटेजी: भारतीय राज्यव्यवस्था एवं शासन

इस खण्ड से वर्ष 2011 में 17 तथा वर्ष २०१२ में २२ प्रश्न पूंछे गये। इस प्रकार इस खण्ड से सर्वाधिक प्रश्न पूंछे गये, जो इस खण्ड के महत्व को ईंगित करते हैं। यह खण्ड इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी खण्ड के मध्यम से देश की शासन व्यवस्था एवं उससे सम्बन्धित संकल्पनाओं तथा प्रक्रियाओं की जानकारी मिलती है।

मास्टर स्ट्रैटेजी : प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन - पेपर - 1 (पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधिता)

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी कैसे करें?

मास्टर स्ट्रैटेजी: पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधिता

नवीन पाठ़्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण, पारिस्थितिक समबंधित मुद़्दों को अलग खण्ड के रूप में सम्मिलित किया गया है। पहले यह भूगोल खण्ड के अन्तर्गत शामिल था। यह अत्यंत महत्वपूर्ण खण्ड है, वर्ष २०११ में इस खण्ड से २० प्रश्न पूंछे गये थे तथा वर्ष २०१२ में भी २० प्रश्न इसी खण्ड से आये थे। वर्तमान में भी पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधिता खण्ड का महत्व  लगातार प्रश्नों के बढ्ते क्रम को देखने से स्पष्ट हो जाता है।

इस खण्ड में पूंछे जाने वाले प्रश्न ऐसे होते है जिनके बारे में हम प्राय: पढते या सुनते रहते हैं। उदाहरण के लिये - ग्लोबल वार्मिंग, अम्लीय वर्षा या फ़िर ओजोन परत के क्षरण जैसे विषयों से जुडे होते हैं। इस प्रकार यह खण्ड व्यवहारिक एवं विश्लेषणात्मक प्रकृति के प्रश्नों से परिपूर्ण होते हैं। इस खण्ड से पशु-पक्षियों, पेड-पौधों की विलुप्त होती प्रजातियों, नई खोजी गई प्रजाति अथवा किसी विशिष्ट कारण से चर्चा में रही प्रजाति के विषय में प्रश्न पूंछे जाते हैं।

मास्टर स्ट्रैटेजी : सामान्य अध्ययन - पेपर - १ (सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा)

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा : ट्रेण्ड एनालिसिस

Master Strategy for IAS Pre Exam

संघ लोक सेवा द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिये मास्टर स्ट्रैटेजी के माध्यम से विद्यार्थी के विभिन्न प्रश्नों का हल दिया जयेगा। जैसे अध्ययन सामग्री का चुनाव कैसे किया जाए, कोचिंग इन्स्टीट्यूट में जाना चाहिये अथवा नहीं, अध्ययन कैसे करना चाहिये, कितनी देर पढना चाहिये, नोट्स बनाने चाहिये अथवा नही इत्यादि सवाल जो कि तैयारी कर रहे प्रत्येक व्यक्ति के मन में घूमते रहते हैं। विद्यार्थीयों को चाहिये की वे भ्रमित न होकर शान्त मन से अध्ययन करें।