Test Series for IAS Pre General Studies (Paper - 1)

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Hindi Articles

IAS Prelims: General Studies (Ancient Indian History) - LITERATURES - Sources in the Gupta Period

Ancient Indian History

http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngSources in the Gupta Period

Literature in Gupta Period

Gupta emperors patronized Sanskrit as the court language which was spoken by the higher classes while the lower classes and women spoke Prakrit.

(i) Secular literature
(ii) Religious literature
(iii) Scientific literature

1. Secular Literature


(a) Kalidas: He was the court poet of Chandragupta Vikramaditya ll. He was a great poet and dramatist. Considered as Shakespeare of the East His work include.

  • Abhijanasakuntalam considered to be one of the 100 best literary work in the world. Love story of king Dushyanta and Shakuntala whose son Bharatha became a famous ruler. William Jones translated this book into English and it filled the romantic imagination of Europe.
  • Malvikagnimitram- Pushyamitra Sunga’s son Agnimitra was viceroy of Vidisha. Mentions the defeat of a yavana ruler by Vasumitra, the son of Agnimitra on the banks of a river Sind (Kalisind).
  • Raghuvamsa- speaks of the allround victories of Rama, and may indirectly refer to some gupta conquests.
  • Kumarasambhav- deals with the courtship of shiva and parvati and the birth of their son skanda.
  • Meghadutam- lyrical poem containing the message from the love – lorn yaksha to his wife pining across the northern mountains in Alaka.
  • Ritusamhara- describes the six seasons in relation to Shringara.

IAS Prelims: General Studies (Ancient Indian History) - Post-Mauryan Period (2nd Century BC to 3rd Century AD)

Ancient Indian History

Post-Mauryan Period (2nd Century B.C to 3rd Century A.D.)http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.png

Inscriptions


(1) Junagarh rock inscription of saka ruler of Ujjain Rudradaman-I dated 150 AD describes the achievements of Rudradaman-I. This is the earliest inscription in chaste Sanskrit.

(2) A number of inscriptions have been found at Nasik associated with Satavahana rulers of Deccan.

(3) Besnagar pillar inscription from Vidisa talks about the pillar constructed by Heliodorus, an ambassador of Indo-Greek king of Taxila called Antialcides to the court of Sunga ruler of Vidisa, Kasiputra Bhagabhadra also called as bhagavata. The inscription is recorded in honour of god of gods vasudeva.

(4) hathigumpa inscription in Prakrit in Udayagiri hills of Orissa records the achievements of Kharavela.

(5) Sarnath inscription highlights the achievements of kanishka, the Kushana ruler.

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (प्राचीन भारतीय इतिहास) पाषाण युग की संस्कृति व जीवन-शैली - भाग - २

भारतीय इतिहास: पाषाण युग की संस्कृति व जीवन-शैली
(Culture or Lifestyle of the Stone Age)


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngमध्यपाषाण काल: जीवन शैली (Mesolithic Age : Lifestyle)

परिवर्तन (Changes)


मध्यपाषाण काल का आरंभ ई. पू. 8000 के आसपास हुआ। जलवायु गर्म व शुष्क हो गई। जलवायु परिवर्तन के साथ ही पेड़-पौधे और जीव- जंतुओ में भी परिवर्तन हुए और मानव के लिए नए क्षेत्रों की ओर अग्रसर होना सभंव हुआ।

  • यह पुरापाषाण काल और नवपाषाण काल के बीच का सक्रमण काल है।
  • मध्यपाषाण काल के मानव शिकार करके मछली पकड़कर और खाध वस्तुएँ एकत्रकर अपना पेट भरते थे तथा आगे चलकर वे पशुपालन भी करने लगे । इनमे शुरू के तीन पेशे तो पुरापाषाण काल से ही चले आ रहे थे पर अंतिम पेशा नवपाषाण संस्कृति से जुड़ा है।
  • अब न केवल बड़े बल्कि छोटे जानवरो का भी शिकार होने लगा।
  • औजार बनाने की तकनीक में परिवर्तन हुआ और छोटे पत्थरो का उपयोग किया जाने लगा।
  • इस काल के महत्वपूर्ण हथियार थे - इकधार फलक (Backed Blade) , बेघनी (Points), अर्ध चन्द्रकाल (Lunate) तथा समलम्ब (Trapeze) ।
  • महत्वपूर्ण स्थल: वीरभारपुर (पश्चिम बंगाल), लधनाज (गुजरात), टेरी समूह (तमिलनाडु), आदमगढ़ (म. प्र.), बागोर (राजस्थान), महादहा, सरायनहरराय (उ. प्र.) ।
  • इस काल में सामाजिक - आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। जनसँख्या में वृदि हुई और आखेट की सुगमता से मनुष्य अब छोटी- छोटी टोलियो में रहने लगा। स्थाई निवास की परंपरा शुरू हुई। पशुपालन एवं कृषि की शुरुआत हुई और मिटटी के बर्तन बनने लगे।

सिविल सेवा परीक्षा के लिए उपयोगी हिंदी समाचार पत्र।

The Hindu Newspaper

Best Hindi Newspapers for IAS Exam


यह अर्टिकल सभी आईएएस उम्मीदवारों के लिए उपयोगी होगा जो कि हिंदी माध्यम में सिविल सेवाओं की परीक्षा मे भाग लेंगे। इस पोस्ट में हम आपको आईएएस / आईपीएस / आईआरएस / आईएफएस-यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी के लिए सर्वश्रेष्ठ हिंदी समाचार पत्रों के बारे में बतायेंगे और ये हिंदी अखबार आपको आपकी आईएएस परीक्षा की तैयारी अवश्य में मदद करेंगे।

तथ्य यह है कि हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के लिए आपको शायद ही कोई हिंदी अखबार मिलेगा जो द हिंदू अखबार के मानक और गुणवत्ता से मेल खा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप आईएएस में अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों से पीछे कहीं हैं। यह कह कर हमारा सिर्फ़ यह मतलब है कि बाजार में ऐसा कोई अख़बार नहीं है जो आपको ’द हिंदु’ जैसी सभी जगहों से जुडी सभी महत्वपूर्ण खबर देगा। आईएएस परीक्षा तैयार करने के लिए आपको दो से अधिक हिंदी अखबारों को पढ़ना होगा। इसलिए मौजूदा मामलों की बात करते समय यह हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए थोड़ा थकाऊ है। सभी हिंदी समाचार पत्रों में सबसे सनसनीखेज सुर्खियां आसानी मिलेंगी लेकिन यदि हम यूपीएससी के मापदण्डों की बात करें तो यह बिल्कुल अलग है।

यूपीएससी में आपसे सीधे सवाल नहीं पूंछे जाते बल्कि वे आपसे कुछ भी पूंछ सकते हैं, और इसलिये आप अख़बार की सारी खबरें पढ़ने का पढ़ने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। यूपीएससी की परीक्षा के दृष्टिकोण से हिंदी अखबारों में संबंधित अध्ययन सामग्री का बहुत सीमित स्थान है और वह इसलिए है क्योंकि वे केवल उन समाचारों को प्रकाशित करते हैं जो उनके लिये उपयोगी अथवा संबंधित प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि विभिन्न स्रोतों से समाचार एकत्रित करने काम आपका है और हम आपको बताएंगे कि कैसे।

नीचे कुछ अच्छे सूचीबद्ध हिंदी समाचार पत्र हैं जिन्हें आपको आईएएस तैयारी के लिए पढ़ना चाहिए। ये हिंदी अखबार सामान्य अध्ययन Prelims Paper- 1 and Main Paper 2 & 3 की तैयारी में आपकी मदद करेंगे।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (प्राचीन भारतीय इतिहास) पाषाण युग की संस्कृति व जीवन-शैली - भाग - १

भारतीय इतिहास: पाषाण युग की संस्कृति व जीवन-शैली
(Culture or Lifestyle of the Stone Age)


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngपुरापाषाण काल : शिकारी और खाद्द संग्राहक (Palaeolithic Age: Hunters and Food Gatherers)

अपवाद स्वरूप दक्कन के पठार में मध्य पुरापाषाण काल और उच्च पुरापाषाण काल दोनों के औजार मिलते है। पुरापाषाण संस्कृति का उदय अभिनूतन युग में हुआ था। इस युग में धरती बर्फ से ढँकी हुई थी। भारतीय पुरापाषाण काल को मानव द्धारा इस्तेमाल किये जाने वाले पत्थर के औजारों के स्वरुप और जलवायु में होने वाले परिवर्तन के आधार पर तीन अवस्थाओ में बाँटा जाता है:

आईएस एग्जाम के लिए द हिन्दू व अन्य समाचार पत्र कैसे पढ़ें ?

How and What to study in "The Hindu" & other Newspapers for Civil Services Examination

The Hindu Newspaper

केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित "सिविल सेवा परीक्षा" के लिए तैयार सभी प्रतियोगियों को इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए उन्हे अपनी अध्ययन प्रणाली में कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना होता है, और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लेते ही उस यात्रा में आने वाली हर परिस्थिति में अपने लक्ष्य के अतिरिक्त कुछ आवश्यक नही होता। इसीलिये प्रतियोगी इस परीक्षा की तैयारी के लिये कई प्रकार की तणनीतियों के अंतर्गत अध्ययन करते हैं, और इस अध्ययन यात्रा का एक महत्वपूर्ण भाग है "दैनिक अखबार" (Daily Newspaper).

IAS Prelims: General Studies (Ancient Indian History) - Mauryan Period (321-184 BC)

Ancient Indian History

Mauryan Period (321-184 BC)http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.png

Archaeological Remains


(1) Use of Iron was on a more extensive scale
(2) Northern Black Polished Ware (NBPW) use continued with increase in variety number and area.
(3) Burnt bricks were used for the first time in the Mauryan period
(4) Ring well were also identified for the first time in the Mauryan Period.
(5) Even in the Mauryan period, we have no evidence of usage of gold coins. Rupyarupa and Pana were the silver coins whereas Tamarupa were the copper coins used in the Mauryan period.
(6) Many wooden palaces and halls were unearthed from the Mauryan period.

Kautilya’s Arthasastra: It is the most important Literary source of the Mauryan period. It is a book on political economy. It was written in Sanskrit ,Arthasastra was divided into 15 adhikarnas (parts). It gives us an idea of the functioning of the Mauryan state.

Megasthens’s Indica: Megasthenes was the greek ambassador of Selucus Nikator to the court of Chandragupta Maurya. His book indica is the foremost among all the foreign accounts for Mauryas.

IAS Prelims: General Studies (Ancient Indian History) - Pre-Mauryan Age 6th – 4th Century BC

Ancient Indian History

Pre- Mauryan Age (6th – 4th Century BC)http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.png

Punch-marked coins: The rise of the Mahajanapadas in the 6th century BC alongwith agricultural surplus, and the rise of arts and crafts which facilitated trade and commerce led to the appearance of coins for the first time in the pre-Mauryan.

Archaeological Remains


(i) Many urban centres such as indraprastha, hastinapura, shravasti, Varanasi, rajagriha, champa on the banks of rivers in north india.
(ii) Northern black polished ware (NBPW) type of pottery was the characteristic feature of this age.
(iii) Iron use increased in this period.
(iv) Mud bricks were used for the construction of cities.
(v) Punch- marked coins were used to facilitate trade and commerce.

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (प्राचीन भारतीय इतिहास) - साहित्यिक स्रोत

भारतीय इतिहास: साहित्यिक स्रोत (Literary Sources)


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngसाहित्यिक साक्ष्य के अंतर्गत साहित्यिक ग्रंथों से प्राप्त सामग्रियो का अध्य्यन किया जाता है। इन साहित्यिक साक्ष्यों को हम दो भागों में बांटते हैं:
(1) धार्मिक साहित्य तथा (2) लैकिक साहित्य

धार्मिक साहित्य में ब्राह्मण तथा ब्राह्मणेतर ग्रन्थ आते है। पुनः ब्राह्मण ग्रंथों में वेद, उपनिषद , रामायण, महाभारत, पुराण तथा स्मृतिग्रंथ आते है, जबकि ब्राह्मणेतर ग्रंथों में बौद्ध तथा जैन साहित्य का उल्लेख किया जा सकता है। इसी तरह लौकिक साहित्य में ऐतिहासिक ग्रंथों, जीवनियाँ, कल्पना - प्रधान तथा गल्प साहित्य आते है।

IAS Prelims: General Studies (Ancient Indian History) - Vedic Period 1500 BC to 600 BC

Ancient Indian History

Sources: The sources of ancient Indian history are multifaceted varying from literature to coins and inscriptions to archaeological remains.


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.png Vedic Period (1500 BC to 600 BC)

Information of the vedic period comes from vedic- literature. The scholars have divided the vedic period into the early vedic period and the later period. The only source of information which belongs to the early vedic is the Rig Veda. All the other components of the vedic literature belong to the vedic period. The vedic literature consists of the Samhitas, Aranyakas and Upanishads. There are also six vedangas and four Upa- Vedas . The samhitas are collections of hymns sung in the praise of various gods.

They are four in number:

  1. Rig Veda
  2. Sama Veda
  3. Yajur Veda
  4. Atharva Veda

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (प्राचीन भारतीय इतिहास) - पुरातत्विक स्रोत

भारतीय इतिहास: प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत


इतिहासकार एक वैज्ञानिक की भाँति उपलब्ध सामग्री की समीक्षा करके अतीत का सही चित्रण करने का प्रयास करता है। उसके लिए साहित्यिक सामग्री, पुरातात्विक साक्ष्य और विदेशी यात्रियों के वर्णन सभी का महत्व है।

http://www.iasplanner.com/civilservices/images/ancient-history.pngप्राचीन भारतीय इतिहास के अध्य्यन के लिए पूर्णत: शुद्ध ऐतिहासिक सामग्री विदेशी की अपेक्षा अल्प मात्रा में उपलब्ध है। यधपि भारत में यूनान के हेरोडोटरश या रोम के लिवी जैसे इतिहासकार नहीं हुए, अतः कुछ पाश्चात्य विद्धानों की यह मानसिक धारणा बन गई थी कि भारतीयों को इतिहास कि समझ ही नहीं थी। लेकिन, ऐसी धारणा बनाना भारी भूल होगी। वस्तुत: प्राचीन भारतीय इतिहास की संकल्पना आधुनिक इतिहासकारो की संकल्पना से पूर्णत: अलग थी। वर्तमान इतिहासकार ऐतिहासिक घटनाओ में कारण - कार्य संबंध स्थापित करने का प्रयास करते है लेकिन प्राचीन इतिहासकार केवल उन घटनाओ या तथ्यो का वर्णन करता था जिनमे आम जनमानस को कुछ सीखने को मिल सके।

IAS Prelims: General Studies (Ancient Indian History) - Periodisation & Eras

Ancient Indian History

Periodisation of Ancient Indian History


Palaeolithic Age 5,00,000 B.C. to 10,000 B.C. (i) Early or lower Palaeolithic Phase

(ii) Middle Palaeolithic Phase 50,000 B.C. to 40,000 B.C.

(iii) Upper Palaeolithic Phase 40,000 to 10,000 B.C.

Mesolithic Age 9,000 B.C. to 4,000 B.C.  
Neolithic Age 5,000 B.C. to 1,800 B.C.  
Chalcolithic Age 1,800 B.C. to 1,000 B.C.  
Iron Age Started from 1,000 B.C. onwards.  
Indus Valley Civilization (Harappan Civilization) 2,900 B.C. to 1,700 B.C. (i) Early Harappan phase 2,900 B.C. to 2,500 B.C.

(ii) Middle Harappan Phase (Mature Harappan Phase) 2,500 to 2,000 B.C.

(iii) Late Harappan Phase 2,000 B.C. to 1,700 B.C.

Vedic Period 1,500 B.C. to 600 B.C.  
Pre-Mauryan Age 6th Century B.C. to 300 A.D.  
Mauryan Age 321 B.C. to 184 B.C.  
Post-Mauryan Age 200 B.C. to 300 A.D.  
Gupta Period 4th Century A.D. to 6th Century A.D.  
Age of Harsha 606 A.D. to 647 A.D.  
Chalukyas of Badami 543 A.D. to 755 A.D.  
Pallavas of Kanchipuram 560 A.D. to 903 A.D.  

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - प्रस्तावना का महत्व व मूल्यांकन

Polity

राज्यव्यवस्था : प्रस्तावना का मूल्यांकन


इसका महत्व

  • यह सरकार के मार्गदर्शक का कार्य करती है।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - पंथनिरपेक्षता, संसदीय / राष्ट्रपतिय लोकतंत्र तथा गणराज्य

Polity

राज्यव्यवस्था: पंथनिरपेक्षता,संसदीय लोकतंत्र एवं अध्यक्षात्मक / राष्ट्रपतिय लोकतंत्र


पंथनिरपेक्षता (Secularism)


  • पंथनिरपेक्षता से तात्पर्य ऐसी व्यवस्था से है जिसमे राज्य का कोई राजकीय धर्म ना हो।
  • नागरिको के बीच धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं।
  • प्रत्येक नागरिक चाहे वह किसी भी धर्म का हो, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त हो।

भारत एक पंथनिरपेक्षता / धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में:

  • संविधान भारत को पंथनिरपेक्ष घोषित करता है।
  • भारत में राज्य का कोई राजकीय धर्मं नहीं है।
  • भारत में समता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है जिसमे धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होगा।

यूपीएससी: आईएएस सामान्य अध्ययन सिलेबस (परीक्षा पाठ्यक्रम)

भारतीय प्रशासनिक सेवा
(यूपीएससी आईएएस सिलेबस)

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सामान्य अध्ययन प्रारंभिक परीक्षा (Prelims Exam)


विषयों की सूची:

  • राष्ट्रीय और अंतर्रराष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं.
  • भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन.
  • भारत एवं विश्व भूगोल – भारत एवं विश्व का प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल
  • भारतीय राज्यतन्त्र और शासन – संविधान, राजनैतिक प्रणाली, पंचायती राज, लोक नीति, अधिकारों संबंधी मुद्दे, आदि।
  • आर्थिक और सामाजिक विकास – सतत वकास, गरीबी, समावेशन, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में की गई पहल आदि।
  • पर्यावरणीय पारिस्थितिकी जैव-विविधता और मौसम परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे, जिनके लिए विषयगत विशेषज्ञता आवश्यक नहीं है।
  • एवं सामान्य विज्ञान

मौलिक अधिकार क्या हैं | Lecture on Fundamental Rights in Hindi

मौलिक अधिकारों का अर्थ

मौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है जो व्यक्ति के जीवन के लिये मौलिक होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं और जिनमें राज्य द्वार हस्तक्षेप नही किया जा सकता। ये ऐसे अधिकार हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिये आवश्यक हैं और जिनके बिना मनुष्य अपना पूर्ण विकास नही कर सकता। ये अधिकार कई करणों से मौलिक हैं:-

मास्टर स्ट्रैटेजी : सामान्य अध्ययन - पेपर - १ (सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा)

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा : ट्रेण्ड एनालिसिस

Master Strategy for IAS Pre Exam

संघ लोक सेवा द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिये मास्टर स्ट्रैटेजी के माध्यम से विद्यार्थी के विभिन्न प्रश्नों का हल दिया जयेगा। जैसे अध्ययन सामग्री का चुनाव कैसे किया जाए, कोचिंग इन्स्टीट्यूट में जाना चाहिये अथवा नहीं, अध्ययन कैसे करना चाहिये, कितनी देर पढना चाहिये, नोट्स बनाने चाहिये अथवा नही इत्यादि सवाल जो कि तैयारी कर रहे प्रत्येक व्यक्ति के मन में घूमते रहते हैं। विद्यार्थीयों को चाहिये की वे भ्रमित न होकर शान्त मन से अध्ययन करें।

प्रांरभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के लिए अचूक रणनीति

प्रांरभिक परीक्षा - सामान्य अध्ययन

रणनीति निर्धारण


Samanya Adhyayanइस सेवा में भविष्य बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये आपमें मेहनत, एकाग्रता, आत्मविश्वास व कुशल प्रबंधन का होना अनिवार्य है। युवा अभ्यर्थी एक प्रमुख बात का ध्यान रखें कि यह सिविल सर्विस सिर्फ एक उज्ज्वल भविष्य की ही बात नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी की सेवा भी हैं और इसमें सेवा के लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने व जनहित में काम करने की आवश्यकता होगी। सिविल सर्विस परीक्षा एस० एस० सी०, बैंकिग, रेलवे व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह एक सामान्य परीक्षा नहीं है, "यह एक मिशन है"।

नये छात्र आईएएस परीक्षा की तैयारी कैसे करें। (Prepare IAS Exam During Graduation)

आईएएस परीक्षा की तैयारी कैसे करें।

Process, Pattern and Strategy to crack IAS Preयह तो हम सभी जानते हैं कि संघ लोक सेवा आयोग (यू०पी०एस०सी०) सिविल सेवा परीक्षा आयोजित कराता है, और यह देश की एक कठिन व प्रतिष्ठित परीक्षा है। फिर भी लाखों युवा छात्र देश के कोने-कोने से इस परीक्षा की तैयारी करते हैं और एक आई०ए०एस० अफसर बनने का सपना देखते हैं। यदि हम इस परीक्षा की प्रक्रिया व प्रकृति को देखें तो हम पायेंगे कि इस परीक्षा में सफलता पाने के लिये हमें चाहिये कि हम एक सटीक रणनीति और व्यवस्था के साथ तैयारी करें। सामान्यत: एक अभ्यर्थी यदि इस परीक्षा की तैयारी स्नातक स्तर से ही शुरू कर दें तो यह भी संभव है कि इस सेवा में जाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, और अभ्यार्थी सफलता पूर्वक इस प्रतिष्ठित सेवा में अपना भविष्य निर्धारित कर सकते हैं ।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - प्रस्तावना

Polity

राज्यव्यवस्था : प्रस्तावना (Preamble)


यह संविधान के लिये आमुख की तरह है जिससे संविधान के उद्देश्यों, आदर्शों, शासन प्रणाली के स्वरूप व संविधान लागू होने का वर्णन होता है।

प्रस्तावना लिखित संविधान की विशेषता मानी गयी है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसम्बर 1946 को संविधान सभा में प्रस्ताव रखा व संविधान सभा ने इसे 22 जनवरी 1947 को स्वीकार कर लिया व यह प्रस्तावना बन गयी।

मास्टर स्ट्रैटेजी : प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन - पेपर - 1 (पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधिता)

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी कैसे करें?

मास्टर स्ट्रैटेजी: पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधिता

नवीन पाठ़्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण, पारिस्थितिक समबंधित मुद़्दों को अलग खण्ड के रूप में सम्मिलित किया गया है। पहले यह भूगोल खण्ड के अन्तर्गत शामिल था। यह अत्यंत महत्वपूर्ण खण्ड है, वर्ष २०११ में इस खण्ड से २० प्रश्न पूंछे गये थे तथा वर्ष २०१२ में भी २० प्रश्न इसी खण्ड से आये थे। वर्तमान में भी पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधिता खण्ड का महत्व  लगातार प्रश्नों के बढ्ते क्रम को देखने से स्पष्ट हो जाता है।

इस खण्ड में पूंछे जाने वाले प्रश्न ऐसे होते है जिनके बारे में हम प्राय: पढते या सुनते रहते हैं। उदाहरण के लिये - ग्लोबल वार्मिंग, अम्लीय वर्षा या फ़िर ओजोन परत के क्षरण जैसे विषयों से जुडे होते हैं। इस प्रकार यह खण्ड व्यवहारिक एवं विश्लेषणात्मक प्रकृति के प्रश्नों से परिपूर्ण होते हैं। इस खण्ड से पशु-पक्षियों, पेड-पौधों की विलुप्त होती प्रजातियों, नई खोजी गई प्रजाति अथवा किसी विशिष्ट कारण से चर्चा में रही प्रजाति के विषय में प्रश्न पूंछे जाते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - भारतीय संविधान के स्रोत

Polity

राज्यव्यवस्था : भारतीय संविधान के स्त्रोत


हमारे संविधान के विशालतम होने के प्रमुख कारण।

  • संविधान निर्माता हर विषय को स्पष्टता के साथ रखना चाहते थे, ताकि भविष्य में विवाद कम हों।
  • भारत के संविधान में प्रांतों का संविधान भी शामिल है, जो इसे व्यापक बना देता है।
  • भारत में भाषायी बहुलता।
  • भारतीय समाज में अस्पष्यता, अनुसूची जाति / जनजाति से संबंधित परिस्थितियों ने संविधान की व्यापकता में योगदन दिया है।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - भारतीय संविधान की विशेषताएं

Polity

राज्यव्यवस्था : भारतीय संविधान की विशेषतायें


भारतीय संविधान लिखित व निर्मित है। इसका वर्गीकरण हम निम्न प्रकार से कर सकते हैं:-

(अ) लिखित : USA, India
अलिखित : Britain

(ब) निर्मित :  USA, India
विकसित : Britain

(स) कठोर / अनम्य : USA

मिश्रण → भारत

लचीला / अनम्य : Britain


प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - संविधान का परिचय व वर्णन

Polity

राज्यव्यवस्था : भारत का संविधान


संविधान उन प्रावधानों का संग्रह है, जिसके आधार पर किसी देश का शासन चलाया जाता है।

राज्यव्यवस्था (Polity)


राज्यव्यवस्था संविधान का अनुप्रयोग है जब संविधान को किसी देश में लागू किया जाता है तो संविधान को लागू करने के क्रम में जो कानून सरकार के निर्णय और संस्थायें उभर कर सामने आती हैं उन्हे सामूहिक रूप से राज्यव्यवस्था कहते हैं।

सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam - An Introduction)

सिविल सेवा परीक्षा

परिचय: प्रतिवर्ष यू०पी०एस०सी० सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन तीन चरणों में करता है - सर्वप्रथम प्रारम्भिक परीक्षा फिर मुख्य परीक्षा तथा अंतिम चरण में अभ्यार्थी का साक्षात्कार / व्यक्तित्व परीक्षण होता है। साक्षात्कार में चयनित अभ्यार्थी अपने अर्जित किये गये अंकों व वरीयता के अनुरूप आई०ए०एस०, आई०पी०एस०, आई०एफ०एस० तथा अन्य केन्द्रीय सेवाओं (ग्रुप ए व ग्रुप बी) के लिए चयनित किये जाते हैं। देश की इस सबसे मुश्किल परीक्षा और इसमें अचूक सफलता के लिए अनुशासन, कठिन परिश्रम, अध्य्यन प्रबंधन और धैर्य ही मूलभूत अधार हैं।

संघ लोक सेवा आयोग - एक परिचय (UPSC - An Introduction)

सिविल सेवा व सिविल सेवा परीक्षा

ऐतिहासिक पृष्टभूमि: भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रवादियों ने जो राजनीतिक आन्दोलन चलाया उसकी एक प्रमुख मांग थी कि लोक सेवा आयोग में भर्ती भारत में हो, क्योंकि तब इसकी परीक्षा इंग्लैंड में हुआ करती थी। प्रथम लोक सेवा आयोग की स्थापना अक्तूबर 1926 को हुई। आज़ादी के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत 26 अक्तूबर 1950 को लोक आयोग की स्थापना हुई। इसे संवैधानिक दर्जा देने के साथ साथ स्वायत्ता भी प्रदान की गयी ताकि यह बिना किसी दबाव के योग्य अधिकारियों की भर्ती क़र सके। इस नव स्थापित लोक सेवा आयोग को संघ लोक सेवा आयोग नाम दिया गया।

मास्टर स्ट्रैटेजी : प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन - पेपर - 1 (भारतीय राज्यव्यवस्था एवं शासन)

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी कैसे करें?

मास्टर स्ट्रैटेजी: भारतीय राज्यव्यवस्था एवं शासन

इस खण्ड से वर्ष 2011 में 17 तथा वर्ष २०१२ में २२ प्रश्न पूंछे गये। इस प्रकार इस खण्ड से सर्वाधिक प्रश्न पूंछे गये, जो इस खण्ड के महत्व को ईंगित करते हैं। यह खण्ड इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी खण्ड के मध्यम से देश की शासन व्यवस्था एवं उससे सम्बन्धित संकल्पनाओं तथा प्रक्रियाओं की जानकारी मिलती है।

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