सामान्य अध्ययन: नीति, अखंडता एवं अभिक्षमता (Ethics and Integrity) की तैयारी कैसे करें।

नीति, अखंडता एवं अभिक्षमता (Ethics and Integrity) की तैयारी के लिये रणनीति।

http://www.iasplanner.com/civilservices/images/Ethics-Integrity.jpg

जैसा कि हम सब सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न और पाठ्यक्रम में हुए परिवर्तनों से परिचित हैं, वर्तमान में निबंध और वैकल्पिक पेपर्स के अलावा मेन में चार (4) सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र हैं। इनमें से नीति, अखंडता एवं अभिक्षमता (Ethics and Integrity) का पेपर कई उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसकी तैयारी के लिये उपयुक्त संसाधन को प्राप्त करना कठिन है और साथ ही साथ इस पत्र में दिये जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देते समय एक अभ्यर्थी को प्राकृतिक / तटस्थ राय और संतुलित विचारधारा के साथ किसी विषय पर अपनी बात समझानी होती है।

अभ्यर्थियों के लिये इस विषय से संबंधित यूपीएससी द्वारा कुछ संकेत।

"इस विषय का उद्देश्य उम्मीदवार की सभी प्रासंगिक समस्याओं की बुनियादी समझ, और विश्लेषण करने की क्षमता, और सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों, उद्देश्यों और मांगों पर अपने पक्ष / विपक्ष  के परीक्षण करने की समझ का आंकलन है। उत्तर देते समय उम्मीदवारों को केवल उस विषय से जुड़े, प्रासंगिक, सार्थक और संक्षिप्त जवाब देने चाहिए।"

उपरोक्त कथन एक अभ्यर्थी की तैयारी के लिए एक मार्गदर्शक की तरह कार्य करता है। यह बिल्कुल आवश्यक नहीं है कि आप सभी विषयों में गुरु बन जायें, लेकिन क्षमताओं की मूलभूत समझ और उनकी विश्लेषणात्मक समझ का विकास करना आवश्यक है। विषयों को अच्छी तरह से पढ़ना और फिर से दोबारा दोहराने से आपको उस विषय पर एक मूलभूत समझ मिलती है। यह भी ध्यान रखें कि इस तरह से अध्ययन करने से आप यूपीएससी परीक्षा की मांग को समझ सकेंगे तथा पढ़ने व लेखन अभ्यास से आपके विश्लेषण करने की क्षमता भी मजबूत होगी।

सही दृष्टिकोण का महत्व


नैतिकता एक तकनीकी विषय नहीं है जिसके लिये बहुत सारी विषयवस्तुओं का अध्ययन करना और उन्हें याद रखने की आवश्यकता होती है। यह वास्तविक जीवन में नैतिक मूल्यों और अवधारणाओं का सरल अनुप्रयोग है। नैतिकता और अखंडता की समझ के लिए सोच में स्थिरता की आवश्यकता होती है और यही इस प्रश्न पत्र में सफलता के महत्वपूर्ण घटक के रूप में कार्य करता है। एक यूपीएससी उम्मीदवार के रूप में हमें समाज, दोस्तों, रिश्तेदारों, दुश्मनों आदि जैसी लगभग सभी चीजों के बारे में विचार बनाने आवश्यकता है। सुननें में यह कुछ अधिक लग सकता है किन्तु देश का प्रतिनिधित्व करने वाले एक सिविल सेवा अधिकारी के लिये यह महत्वपूर्ण है।

यह हमारे जीएस पेपर 4 की तैयारी के लिए काफी मायने रखता है क्योंकि किसी स्थिति का आकलन हमारे वर्तमान व्यक्तित्व और चरित्र से प्रेरित होता है। इसलिए हमें ईमानदारी से इस समझ की नींव का निर्माण करना चाहिए जिसको समझने की विषयवस्तु प्राय: पुस्तकों या वेबसाइटों में नहीं मिल पाती है। यह कुछ ऐसा है जिसे हम अपने बचपन के समय की विचारधारा और परिस्थितियों से जोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिये जैसे ही हम बड़े होते हैं, हम चीजों को जटिल करते हैं और अपने द्वारा किय गये कार्यों का आकलन दूसरों की प्रतिक्रिया या निर्णय के आधार पर करते हैं। प्राय: हम अपने चरित्र और अखंडता को सामाजिक स्वीकृति के आधार पर रख कर देखते हैं। यूपीएससी इस दुविधा को अच्छी तरह से समझता है और इसलिए समय की इतनी छोटी अवधि में कई सवालों पर परीक्षण किया जाता है।

नोट: ध्यान रहे कि पहले से तैयार किये उत्तर इस प्रश्नपत्र में कोई विशेष भूमिका नही निभाते पाते हैं।

नोट करने के लिए कुछ जरूरी संकेत


विषय के निर्धारित पाठ्यक्रम की आवश्यकता के अनुसार ही अध्ययन किया जाना चाहिये। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, यह नैतिक मूल्यों और अवधारणाओं का वास्तविक जीवन में एक सरल अनुप्रयोग की समझ पर आधारित है। इसके लिये घंटों अध्ययन करने की ज़रूरत नहीं है जैसे अन्य जीएस पेपर्स के लिए आवश्यक है।

एक उम्मीदवार को कई जटिल जार्गन, विभिन्न सिद्धांतों, विचारक की बातें और उद्धरण, परिभाषाएं और दार्शनिक चीजों को बहुत अधिक अपनाने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि किसी के भी लिये विभिन्न परिस्थितियों में नैतिक मूल्यों और अवधारणाओं की समझ के साथ उचित निर्णय लेने का अध्यन संभव नही है, कि किस परिस्थिति में उसे क्या करना चहिये।

समझ का निर्माण और अध्ययन करने के लिए यह महत्वपूर्ण युक्तियां।


  • अपने नोट्स में अच्छे शब्दों, उदाहरण आदि का एक संग्रह बनाएं।
  • एक परीक्षक आपके उत्तर को एक दार्शनिक के बजाय एक तार्किक लेखन शैली की दृष्टि से देखता है। इसलिए फिलोसोफी के बजाय अपनी तर्कों और तथ्यों को प्रस्तुत करने पर ध्यान देना चाहिए।
  • यह सलाह दी जाती है कि किसी के उत्तर में नैतिकता को अधिक बल न दें। और प्रईक्षक को यदि यह बनावटी लगता है, तो उसे गंभीर रूप से दंडित किया जाएगा।
  • अपनी कमजोरियों को अच्छी तरह समझें और ऐसे मुश्किल और पेंचीदा सवालों के जवाब देने में स्मार्ट बनें।
  • पिछले वर्षों के यूपीएससी पेपर्स को जांचे और हल करें। विशेष मामलों के अध्ययन (Case Studies) और व्यक्तिगत राय (Personal Opinion) पर आधारित सवालों का निरीक्षण करें और उनके उत्तर देने की समझ को विकसित करें।
  • भारत और विश्व में होने वाली नवीनतम व बड़ी घटनाओं का एक संग्रह रखने की जरूरत है क्योंकि आप उन्हें अपने उत्तर में उदाहरण के रूप में उद्धृत कर सकते है।
  • एक अच्छी टेस्ट सीरीज़ लीजिए क्योंकि 3 घंटों की समयावधि में इतने लंबे उत्तर लिखने के लिए बहुत सारे अभ्यासों और समय प्रबंधन की जरूरत पड़ती है।

एथिक्स के उत्तर कैसे लिखें?


इसे जितना संभव हो उतना आसान रखते हुए इस प्रश्न पत्र को हल करने नीति ही इसमें सफलता प्राप्त करने की कुंजी है। यहां हम ये जानेंगे कि इस प्रश्नपत्र के लिये क्या करें और क्या ना करें।

क्या कार्य करें
  • उत्तर को नैतिक, व्यावहारिक और मूल्यों और अवधारणाओं के आसपास रखने की कोशिश करें।
  • उदाहरणों, चित्रों और वर्तमान मामलों इत्यादि को जब आवश्यक हो तभी जोड़ा जाना चाहिये।
  • जहां भी संभव हो, सरकारी नीतियों, योजनाओं, पहल इत्यादि का उपयोग विषय से संबंध को ध्यान में रखते हुए करें।
  • आप जहां भी संभव हो वहां अपने उत्तरों को समृद्ध करने के लिए विद्वानों, नैतिक संकल्पनाओं और उद्धरणों का उपयोग भी कर सकते हैं।

क्या न करें

  • बहुत ही ज्यादा सामान्य तरीके से लिखने की कोशिश न करें।
  • यदि तकनीकी भाषा शैली, सिद्धांतों, विचारकों के उद्धरणों की जरूरत नहीं है तो उन्हें उद्धृत करने का प्रयास न करें। प्रश्न के संदर्भ के अनुसार लिखना और यथासंभव व्यावहारिक रूप अपना तर्क रखना और उत्तर देना अधिक महत्वपूर्ण है।


data-matched-content-ui-type="image_card_stacked"

Go to Monthly Archive