आईएएस परीक्षा के लिए आर्थिक सर्वेक्षण की तैयारी कैसे करें।

यूपीएससी परीक्षा के लिए आर्थिक सर्वेक्षण कैसे पढ़ें?


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प्रिय अभ्यर्थियों, भारत का आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा जारी किया जाने वाला एक प्रमुख वार्षिक दस्तावेज है। यह पिछले 12 महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास  की समीक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों की जानकारी देता है। यह सरकार के नीतिगत पहल और लघु और मध्यम अवधि में अर्थव्यवस्था की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी देता है। इस लेख में हम यूपीएससी परीक्षा के लिए आर्थिक सर्वेक्षण के महत्व और इसके अध्ययन के बारे में समझेंगे।

आर्थिक सर्वेक्षण और इसका उद्देश्य


सिविल सेवा की परीक्षा के लिए आर्थिक सर्वेक्षण की प्रासंगिकता बहुत महत्वपूर्ण है, चूंकि यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास से संबंधित है जो सिविल सेवा परीक्षा पाठ्यक्रम का एक हिस्सा भी है। इसके माध्यम से देश की विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों की प्रगति को जानने और उसका विश्लेषण करने में मदद मिलती है और साथ ही इसे निबंध पेपर के लिए भी एक प्रभावी स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रहे कि प्रारंभिक परीक्षा में इस भाग में से 5 से 6 अप्रत्यक्ष प्रश्नों की अपेक्षा आसानी से की जा सकती है। पिछले 3-4 वर्षों में सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र का विश्लेषण किया जाय तो हम यह समझ सकते हैं कि पूछे गये कुल 20 से अधिक प्रश्नों में से लगभग 7 से 8 प्रश्न आर्थिक सर्वेक्षण से सीधे रूप पूछे गये हैं।

यह किताब परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन इस किताब के पृष्ठों की संख्या और इसमें दी गयी जानकारी की मात्रा भी बहुत अधिक है। यदि आपके पास अध्ययन के लिये पर्याप्त समय है, तो हम इसे बेहतर और विस्तृत तरीके से पढ़ने की सलाह देंगे। इससे आपको किसी विषय या टापिक को समझने और एक उसमें एक समग्र रूपरेखा प्राप्त करने में मदद मिलती है। यदि आपके पास अध्ययन का समय से कम है तो हम सुझाव देंगे, कि कम से कम बाक्स (Highlighted) में दी गई जानकारियों और आंकणों को गंभीरता से पढ़ें और उन्हें परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की दृष्टि से तैयार करें।

आर्थिक सर्वेक्षण को समझने के लिये टिप्स


यदि आपको अर्थशास्त्र के मूल सिद्धांतों की जानकारी नहीं है और इसे समझनें में कठिनाई होती है तो इस स्तर पर आप आर्थिक सर्वेक्षण को समझ नहीं पाएंगे। ऐसे मामले में, हम यह सुझाव देंगे कि आर्थिक सर्वेक्षण का अध्ययन करते समय इसकी मूल शब्दावली के बारें मे समझें और उन कीवर्ड (Keywords) के बारें में जानें जिससे आप अनजान हैं। तभी आप आर्थिक सर्वेक्षण में दी गयी अवधारणाओं को भी स्पष्ट रूप से समझ पाएंगे और मौजूदा मामलों के साथ उनके लिंक (Relation) के कारण भी समझ सकेंगे जो आईएएस प्रीलिम्स परीक्षा के लिये अति उपयोगी है।

एक अच्छे अभ्यर्थी को हम यह सुझाव देंगे कि वह कम से कम तीन बार इसका संशोधन और अध्ययन करें, जिससे इस विषय में एक सुरक्षित और मजबूत समझ का विकास हो सके। यदि आपके पास पर्याप्त समय है तो वर्तमान वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण के साथ-साथ पिछले साल के सर्वेक्षण को भी पढ़ने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह आपको इस विषय में एक अंतर्दृष्टि देगा, जैसे - अगले वर्ष के लिए निरधारित लक्ष्य (इस वर्तमान वर्ष के लिए) क्या निर्धारित किया गया था और क्या हम इसे हासिल कर पाए हैं? यदि नहीं, तो इसके क्या कारण थे?

आर्थिक सर्वेक्षण में दिये गये तथ्यगत (Factual) आंकड़ो और सारणियों को याद रखना अनिवार्य नहीं है। सर्वेक्षण के माध्यम से विश्लेषण और महत्वपूर्ण संख्याओं को याद रखने और उनके अध्ययन को ध्यान में रखते हुए आपको अपने अध्ययन के अंत में नोट्स बनानें (Make Notes of Important Points) की सलाह दी जाती है, उदाहरण के लिए: बेरोजगारी डेटा, जीडीपी संख्या तथा कुछ महत्वपूर्ण मैक्रो-आर्थिक संकेतक (Macroeconomic Indicator) इत्यादि। ध्यान रहे, कि आंकड़ों व संख्याओं की संक्षिप्त जानकारी भी आपके लिये लिए पर्याप्त है किन्तु इन सभी का अध्ययन करने के लिये हमें यह पता होना चाहिये कि क्या और कितना पढ़ना है।

अध्यायवार अध्ययन संबंधी कुछ संकेत


आर्थिक सर्वेक्षण खंड - १ (Economic Survey Volume - 1):  इस भाग के अध्यायों क्रमश: 1, 2, 3, 4, 7, 9, 10, 11 का संपूर्ण अध्ययन पहली प्राथमिकता के साथ करना चाहिये तथा अध्यायों 5, 6, 8 तथा फ़ोकस किये गये या बाक्स में दिये गये तथ्यों और आंकणों का अध्ययन आपकी दूसरी प्राथमिकता होगा।

आर्थिक सर्वेक्षण खंड - २ (Economic Survey Volume - 2):  इस खंड से पहले संपूर्ण अध्याय 1, 2, 3, 5, 8, 9 तथा बाद में अध्याय 4, 6 और 7 का अध्ययन करना चाहिये और साथ ही इसमें फ़ोकस किये गये या बाक्स में दिये गये तथ्यों और आंकणों को भी भलीभांति समझना चाहिये।

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