April 2017

मास्टर स्ट्रैटेजी : प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन - पेपर - 1 (भारतीय राज्यव्यवस्था एवं शासन)

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी कैसे करें?

मास्टर स्ट्रैटेजी: भारतीय राज्यव्यवस्था एवं शासन

इस खण्ड से वर्ष 2011 में 17 तथा वर्ष २०१२ में २२ प्रश्न पूंछे गये। इस प्रकार इस खण्ड से सर्वाधिक प्रश्न पूंछे गये, जो इस खण्ड के महत्व को

सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam - An Introduction)

सिविल सेवा परीक्षा

परिचय: प्रतिवर्ष यू०पी०एस०सी० सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन तीन चरणों में करता है - सर्वप्रथम प्रारम्भिक परीक्षा फिर मुख्य परीक्षा तथा अंतिम चरण में अभ्यार्थी का साक्षात्कार / व्यक्तित्व परीक्षण होता है। साक्षात्कार में चयनित अभ्यार्थी अपने अर्जित किये गये अंकों व

साक्षात्कार के माध्यम से चयन के संबंध में पूछे जाने वाले प्रश्न तथा उत्तर

साक्षात्कार बोर्ड द्वारा उम्मीदवारों का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाता है?


  • साक्षात्कार का उद्देँश्य उम्मीदवार को जिस पद पर साक्षात्कार के लिये बुलाया गया है उसके संबंध में उसकी व्यक्तिगत उपयुक्तता का मूल्यांकन करना है। इसका उद्देँश्य उम्मीदवार के बारे में उचित तथा निष्पक्ष मूल्यांकन के माध्यम से यथासंभव अधिकतम क्षमताओं का पता लगाना है और उसके समग्र निष्पादन के आधार पर अंक प्रदान करना है।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - संविधान का परिचय व वर्णन

Polity

राज्यव्यवस्था : भारत का संविधान


संविधान उन प्रावधानों का संग्रह है, जिसके आधार पर किसी देश का शासन चलाया जाता है।

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - भारतीय संविधान की विशेषताएं

Polity

राज्यव्यवस्था : भारतीय संविधान की विशेषतायें


भारतीय संविधान लिखित व निर्मित है। इसका वर्गीकरण हम निम्न प्रकार से कर सकते

प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन (राज्यव्यवस्था) - प्रस्तावना

Polity

राज्यव्यवस्था : प्रस्तावना (Preamble)


यह संविधान के लिये आमुख की तरह है जिससे संविधान के उद्देश्यों, आदर्शों,

मौलिक अधिकार क्या हैं | Lecture on Fundamental Rights in Hindi

मौलिक अधिकारों का अर्थ


http://www.iasplanner.com/civilservices/images/human-rights.jpgमौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है जो व्यक्ति के जीवन के लिये मौलिक होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं और जिनमें राज्य द्वार हस्तक्षेप नही किया जा सकता। ये ऐसे अधिकार हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिये आवश्यक हैं और जिनके बिना मनुष्य अपना पूर्ण विकास नही कर सकता। ये

Pages

data-matched-content-ui-type="image_stacked"